बीटी फसलों पर अवैज्ञानिक पूर्वाग्रह से हार न मानें : प्रधानमंत्री
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जम्मू(आईएएनएस) 03-Feb-2014
जीन संवर्धित या जैवप्रौद्योगिकी (बीटी) फसल की वकालत करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को कहा कि देश को बीटी फसल पर कायम अवैज्ञानिक पूर्वाग्रह से हार नहीं मानना चाहिए। 101वें भारतीय विज्ञान कांग्रेस के उद्घाटन सत्र में सिंह ने यहां कहा, "सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए, लेकिन बीटी फसलों पर कायम अवैज्ञानिक पूर्वाग्रह से हार नहीं माननी चाहिए। हमारी सरकार कृषि के विकास के लिए इन नई प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।"उन्होंने कहा कि जैवप्रौद्योगिकी में उत्पादन बढ़ाने की बेशुमार संभावना है।उन्होंने कहा, "मैं वैज्ञानिक समुदाय से अपील करता हूं कि वे समाज के साथ घुल-मिलकर और संवाद स्थापित कर छोटे और मझोले उद्यमों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी विकल्पों को अपनाने के बारे में बताएं।"
पांच दिवसीय सम्मेलन जम्मू विश्वविद्यालय में सोमवार को शुरू हुआ।सिंह ने एक नई पहल की घोषणा की, जिसके तहत विदेशों में काम करने वाले प्रख्यात वैज्ञानिकों को वापस देश में आकर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।उन्होंने कहा, "नई पहल 25 जवाहरलाल नेहरू फेलोशिप की स्थापना है। इसके तहत अगले तीन साल तक विदेशों में काम करने वाले प्रख्यात वैज्ञानिकों को 12 महीने तक भारत में काम करने के लिए आमंत्रित किया जाएगा।"करीब 200 नामांकन में से सरकार ने फेलोशिप के लिए प्रथम पांच वैज्ञानिकों का चुनाव कर लिया है। इनमें टेक्सस विश्वविद्यालय के कंप्यूटेशनल बायोलॉजिस्ट एम. विद्यासागर, कैंब्रिज विश्वविद्यालय के जीवन वैज्ञानिक अजीम सुरानी और बेडफोर्ड इंस्टीट्यूट ऑफ ओसीनोग्राफी के भूगर्भ वैज्ञानिक ट्रेवर चार्ल्स प्लैट जैसे वज्ञानिक शामिल हैं।
फेलोशिप के तहत प्रत्येक वैज्ञानिक को तीन साल के लिए सालाना एक लाख डॉलर दिया जाएगा।सिंह ने देश में विज्ञान पर सालाना खर्च बढ़ाने की वकालत भी की।उन्होंने कहा, "हमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर होने वाले खर्च को सालाना जीडीपी के कम से कम दो फीसदी तक ले जाना चाहिए।"सिंह ने 4,500 करोड़ रुपये की लागत से नेशनल मिशन ऑन हाई कंप्यूटिंग की भी घोषणा की और कहा कि सरकार 3,000 करोड़ रुपये की लागत से नेशनल ज्योग्राफिक इंफोर्मेशन सिस्टम की स्थापना पर भी विचार कर रही है।