5 Dariya News

पंजाब सरकार द्वारा स्कूल से वंचित बच्चों को शिक्षा उपलब्ध करवाएगी-मलूका

5 दरिया न्यूज

चंडीगढ 28-Jan-2014

पंजाब सरकार द्वारा राज्य के समूह स्कूलों से वंचित बच्चों को शिक्षा उपलब्ध करवाने का निर्णय किया है। विशेषकर ईंटों के भटटों पर काम कर रहे मजदूर और प्रवासी मजदूरों के बच्चों को भी अनिवार्य शिक्षा दी जाएगी।आज पंजाब के शिक्षा व भाषा मंत्री सिंकदर सिंह मलूका ने बताया कि पंजाब सरकार राज्य के प्रत्येक बच्चे विशेषकर भटटों पर कार्य कर रहे परिवारों के बच्चें,प्रवासी मजदूरों के परिवारों के गलियों में खेलते बच्चे स्कूल से वंचित बच्चे,भिखारियों के बच्चे और अल्पसंख्यक कम्यूनिटी की लड़कियों को अनिवार्य शिक्षा देने के लिए स्कूलों में दाखिल किया जाएगा। मंत्री ने आगे बताया कि स्कूलों से वंचित बच्चों को स्कूल में दूसरे बच्चे के स्तर में पाए अंतर को खत्म करने के लिए उनको विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा उन्होने बताया कि स्कूल प्रंबधक कमेटियों और लोकल अधिकारी स्पेशल ट्रेनिंग देने वाले बच्चों की पहचान करने के पश्चात विशेष प्रशिक्षण दिलाने के लिए योग्य जरूरी प्रंबध करेगें। अकादमिक अथारटी द्वारा आयु के हिसाब से आवश्यक विशेष शिक्षा मटीरियल उपलब्ध करवाया जाएगा। मंत्री ने आगे बताया कि इस उदेश्य के लिए पहले ही शीघ्र कार्यवाही के उदेश्य से बच्चों की पहचान करने के लिए विभाग द्वारा बेव बैस्ट चाईल्ड ट्रेकिंग सिस्टम विकसित किया गया है और सिस्टम समय समय पर  अपडेट भी किया जाएगा। इस सिस्टम द्वारा यह भी यकीनी बनाया जा सकेगा की पहचान किये बच्चे प्रतिदिन स्कूल जाए।

मलूका ने आगे बताया कि स्कूल के रैगलूर स्कूल के मुख्यों की देख रेख अधीन पहचान किये गये बच्चों को स्पेशल ट्रेनिंग दी जाएगी या स्कूल मैनेजमैंट कमेटी और लोकल अथारटी द्वारा स्पेशल टीचर नियुक्त किये जाएगें। यह स्पेशल ट्रेनिंग कम से कम तीन महीने की होगी और बच्चों की सीखने की समर्था की असैसमैट के मध्यनजर यह ट्रेनिंग तीन वर्ष तक बढाई जा सकेगी उन्होने आगे बताया कि बच्चों को स्पेशल टेनिंग देने के पश्चात उनकी आयु के हिसाब से उनको कलास में भेजा जाएगा और अध्यापक इन बच्चें पर विशेष ध्यान देगें ताकि वह कक्षा में पढ रहे दूसरे बच्चों के बराबर हो सकें।मलूका ने बताया कि राज्य सरकार ढाणीयों, ढाबों और छोटे गांवों के बच्चों के लिए यदि उनकी रिहायश के निकट स्कूल नही है तो लोकल अथारटी निकटतम स्कूलों में इन बच्चों को एलीमैंटरी अनिवार्य शिक्षा देने के लिए उनको अन्य स्कूलों में पहुंचाएगी या  उनकी रिहायश और अन्य उचित प्रंबध करेगी।उन्होने आगे बताया कि राज्य सरकार जहां भी इन बच्चों संख्या अधिक होगी के निकटतम इलाके में एक या इससे अधिक स्कूल खोलेगी। शिक्षा विभाग सर्व शिक्षा अभियान तहत जिला स्तर के अधिकारी इन बच्चों का लगातार और समय समय पर मूल्याकंन करेगें।