स्वाभिमान, सम्मान और मर्यादा का पावन पर्व है गणतंत्र दिवस
5 दरिया न्यूज (नेहा वर्मा)
26-Jan-2014
गणतंत्र दिवस देश के स्वाभिमान, सम्मान और मर्यादा का पावन पर्व माना जाता है, परंतु लोग अब इस दिन के महत्व को भूलते जा रहे हैं। इसी दिन यानि 26 जनवरी, 1950 को देश का संविधान लागू किया गया। कानूनविदों में तो देश के संविधान को लेकर ही कानूनी जंग भी होती है। इसी दिन असल में भारत को एक संप्रभु देश का दर्जा मिला और इस दिन को राष्ट्रीय पर्व घोषित कर देश में छुट्टी घोषित हुई। इस दिन राष्ट्रपति सेना के तीन अंगों स्थल, जल और वायु सेना के प्रमुखों से सलामी लेते हैं। नई दिल्ली में इस संबंध में राष्ट्रीय समारोह में हर वर्ष किसी न किसी देश के प्रमुख को मुख्य अतिथि बनाने के अलावा देश के विभिन्न हिस्सों से आए बच्चे अपनी-अपनी कला के जौहर दिखाते हुए सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं। इस अवसर पर लाखों की संख्या में मौजूद लोगों का एक साथ राष्ट्रगान देश प्रति समर्पित होने का गर्व प्रदान करता है। राष्ट्रपति देश के नाम संदेश देने के अलावा उन्हें स मानित भी करते हैं, जिन पर देश गर्व कर सकता है। इस दिवस पर उन बहादुर सैनिकों और स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया जाता है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्यौछावर किया। इसी दिन बहादुर लोगों को पदक प्रदान कर गौरवान्ति किया जाता है। लाखों लोग इस भव्य समारोह में शामिल होते हैं एक मनमोहक दृष्य देखते बनता है। समापन समारोह के अवसर पर लोकप्रिय धुन सारें जहां से अच्छा हिंदुस्तां हमारा, बजाई जाती है। इस तरह लोगों में देश प्रेेम की भावना पनपती है। इस समारोह का महत्व तभी बना रहेगा, जब लोग संविधान के अनुरूप चलें और भेदभाव से ऊपर उठ कर राष्ट्र के निर्माण में सहयोग करें।