वर्ष 2030 तक मौजूदा 27 प्रतिशत क्षेत्र को 30 प्रतिशत करने का लक्ष्य : गोविन्द सिंह ठाकुर
ऽवन रक्षकों को हथियार खरीदने के लिए प्रदान किया जाएगा 12000 रुपये का अनुदान
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शिमला 06-Jul-2018
वन मंत्री गोविन्द सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2030 तक वन अच्छादित क्षेत्र को 27 प्रतिशत से 30 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने उम्मीद जताई की विभाग इस लक्ष्य को निर्धारित अवधि से पूर्व ही हासिल कर लेगा। वन मंत्री गत सांय वन रक्षकों के द्वितीय राज्य स्तरीय सम्मेलन को सम्बोधित कर रहे थे।वन मंत्री ने कहा कि वन रक्षकों की वन सम्पदा के संरक्षण में अहम भूमिका रहती है। उन्होंने कहा कि वन रक्षकों को चरणबद्ध तरीके से हथियार उपलब्ध करवाएं जाएंगे, जिसके लिए उन्हें हथियार खरीदने के लिए 12000 रुपये का अनुदान दिया जाएगा। इन हथियारों के लाईसेंस वन रक्षकों के नाम से होंगे। उन्होंने कहा कि वन सम्पदा को फायर सीजन के दौरान बचाने के लिए वन रक्षकों को सुरक्षा यंत्रों जैसे फायर प्रूफ जैकेट, गल्बज व बूट इत्यादि उपलब्ध करवाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में फायर लाइन को वर्तमान 2500 किलोमीटर से 3000 किलोमीटर किया जाएगा और अगले वर्ष क्राउन फायर से निपटने के लिए हेलीकॉप्टर का भी प्रयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जंगलों में आग से निपटने के लिए विभाग द्वारा फायर सीजन के दौरान किराए पर वाहन लेने को भी मंजूरी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जंगलों को अग्नि से बचाने के लिए पैसे की कमी आडे़ नहीं आने दी जाएगी।
वन मंत्री ने कहा कि चील की पत्तियों से बनने वाले उत्पादों के लिए प्रदेश में उद्योग लगाए जाएंगे। उद्योग लगाने वाले को सरकार उद्योग लागत का 50 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध करवाएगी। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा फायर वाचर की भी भर्ती की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बन्दरों की समस्या से निपटने के लिए व्यापक बन्दर नसबन्दी अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने विभाग के अधिकारियों को वृत स्तर पर कार्यशाला आयोजित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने वन कर्मियों के लिए वृत स्तर पर जिम सुविधा उपलब्ध करवाने की भी घोषणा की।अतिरिक्त प्रधान सचिव वन श्री तरूण कपूर ने इस अवसर पर कहा कि वन रक्षक विभाग की रीड हैं क्योंकि विभाग की योजनाओं को धरातल पर कार्यान्वित करने में वन रक्षकों की अहम भूमिका रहती है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पर्यटन, उद्यान तथा पन विद्युत की अपार सम्भावना है तथा इन सभी कार्य में वन विभाग अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने वन रक्षकों से विकासात्मक कार्य के साथ-साथ पौधरोपण व वन सुरक्षा कार्य में भी बढ़चढ़ कर भाग लेने का आग्रह किया।प्रधान मुख्य अरण्यपाल डॉ. जी.एस. गोराया ने इस अवसर पर वन रक्षकों को कार्यशाला में दी गई जानकारी बारे बताया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष गर्मियों के मौसम में सामान्य से तीन डिग्री अधिकतम तापमान दर्ज किया गया और मौसम भी अधिक समय तक शुष्क रहा, जिसके कारण वनों में आग की अधिक घटनाएं घटी। उन्होंने कहा कि यह सुखद विषय रहा है कि वन अग्नि के लिए जागरूकता अभियान के चलते स्थानीय लोगों व वन रक्षकों ने मिलकर आग बुझाने के कार्य से इन घटनाओं पर जल्द ही काबू पा लिया गया। उन्होंने कहा कि वन आग की अधिकतर घटनाओं को 12 से 24 घण्टों के बीच ही काबू पा लिया था।सम्मेलन में प्रदेश के 13 वन वृतों के लगभग 200 वन रक्षकों ने भाग लिया। इस दौरान वन रक्षकों द्वारा प्रस्तुतियां भी दी गई।कार्यशाला में प्रधान मुख्य अरण्यपाल (वन्य प्राणी) डॉ. आर.एस. कंग, पीसीसीएफ एडमिनिस्ट्रेशन एस.के. शर्मा व विभाग के अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।