देसी नस्ल की गायों का संरक्षण आवश्यक : वीरेन्द्र कवंर
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श्रीनगर 13-Jun-2018
प्रदेश में देसी नस्ल की गायां के पालन व संरक्षण पर बल दिए जाने की आवश्यकता है। देसी नस्ल की गायें सदियों से किसानों व उपभोक्ताओं को बेहतर दूध प्रदान करने का स्त्रोत रहीं हैं। लोगों ने सदैव ही देसी नस्ल की गायों पर विश्वास जताया है तथा प्रदेश सरकार राज्य में प्रदान की जाने वाली विभिन्न सुविधाओं के माध्यम से पशुपालन के विकास व कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।यह बात पशुपालन मंत्री श्री वीरेन्द्र कंवर ने 11 व 12 जून, 2018 को जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान व तकनीक विश्वविद्यालय में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की क्षेत्रीय समिति द्वारा आयोजित 25वीं बैठक में कही। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखण्ड में कृषि अनुसंधान व शिक्षा की समीक्षा के साथ-साथ इन प्रदेशों में कृषि, पशुपालन, बागवानी, मत्स्य पालन व वन क्षेत्र से सम्बन्धित स्थल विशिष्ट समस्याओं का विश्लेषण, विचार विमर्श व संस्तुति करना है।मंत्री ने उच्च जनेटिक गुणवत्ता वाले देसी बैलों के भ्रूण/वीर्य की आवश्यकता पर बल दिया। उत्तराखण्ड के पशुपालन निदेशक ने आश्वासन दिया कि एक माह के भीतर 4500 लीटर से अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य वाले लाल सिन्धी नस्ल के बैलों के वीर्य की 45000 डोज़ की आपूर्ति की जाएगी। उन्होंने कहा कि भ्रूण की आपूर्ति भी मांग के अनुसार की जाएगी। श्री कवंर द्वारा साहिवाल नस्ल के वीर्य के मुददे को उठाने पर प्रतिक्रिया करते हुए एनडीआरआई करनाल के प्रतिनिधि ने आश्वासन दिया कि साहिवाल नस्ल के उच्च जनेटिक गुणवत्ता वाले बैलों के वीर्य की आपूर्ति की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश की गायों की संख्या को स्तरोन्नत करने के लिए पालमपुर स्थित वीर्य केन्द्र के लिए कुछ समय में बैलों की आपूर्ति भी की जाएगी।
वीरेन्द्र कंवर ने पशु-चारें की कमी की समस्या से निपटने के लिए चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय (सीएसकेएचपीकेवी) पालमपुर के कुलपति को संयोजित आहार खण्ड बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय भेड़ प्रजनन फार्मों में अन्तः प्रजनन की समस्या से निपटने के लिए जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखण्ड द्वारा 40 मेढ़े तथा प्रत्येक प्रदेश के लिए रैनबोयलेट व मरीनों नस्ल की 200 भेड़ें आयात करने का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा तथा केन्द्र सरकार के समक्ष उठाया जाएगा।मंत्री ने कहा कि सीएसकेएचपीकेवी पालमपुर ने ऑप्रेशन गौ-सदनज के लिए एक सत्त मॉड्यिल विकसित किया है, जो कि आगामी कार्यवाही के लिए उपलब्ध करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पशमीना उत्पादन के लिए लाहौल-स्पिति के भेड़ पालकों की सुविधा के लिए जम्मू-कश्मीर के लद्दाख से चंगथांगी नस्ल की बकरियां लाई जाएंगी।बैठक में जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल नरेन्द्र नाथ वोहरा, जम्मू-कश्मीर के कृषि मंत्री मोहम्मद खलील बन्ध, जम्मू-कश्मीर के पशु व भेड़ पालन मंत्री अब्दुल घनी कोहली, कृषि अनुसंधान व शिक्षा के विशेष सचिव व आईसीएआर नई दिल्ली के सचिव छबीलेन्द्र राउल तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।