विस्थापित कोटा के 3000 पद भरे, 2575 और भर्ती के लिए भेजे : जावेद मुस्तफा मीर
5 Dariya News
जम्मू 06-Feb-2018
आपदा प्रबंधन, राहत एवं पुनर्वास व पुनर्निर्माण मंत्री जावेद मुस्तफा मीर ने आज विधान परिषद को बताया कि सरकार ने कश्मीरी विस्थापित रोजगार पैकेज के तहत 3000 पदों को भर दिया है, जबकि संबंधित एजेंसी को भर्ती के लिए 2575 अतिरिक्त पद भेजे गए है। एमएलसी, गिरधारी लाल रैना, द्वारा लिखित प्रष्न पर चेयरमैन द्वारा अनुमोदित चर्चा का जबाव देते हुए मंत्री ने सदन को बताया कि सरकारी आदेश संख्य रेव/एमआर/ 2009 का 147 दिनांक 28.10.2009 के अनुसार वर्ष 2009 में सरकार ने कश्मीरी विस्थापित रोजगार पैकेज की घोषणा की थी, जिसमें सरकार ने विभिन्न विभागों में 3000 पदों का सृजन किया।उन्होंने कहा ‘सभी 3000 पदों को जेकेएसएसबी और राहत आयुक्त (प्रवासियों) जम्मू को वर्ष 2010 में भेजा गया था और भर्ती एजेंसियों द्वारा किए गए चयन के बाद, वर्ष 2010-11 में 1446 उम्मीदवार नियुक्त किए गए थे।’’ उन्होंने बताया कि कई उम्मीदवारों ने अपने चयन के बाद नौकरी नहीं की, जबकि कई आवेदकों आरक्षित श्रेणियों के तहत उपलब्ध नहीं थे, इसलिए 1554 पद रिक्त रहे। उन्होंने आगे बताया कि अधिकतर उम्मीदवार अरयु सीमा की वजह से अयोग्य हो गए और अना आरक्षित होने से पहले, खुली योग्यता के उम्मीदवारों कोएक समय की छूट दी गई और तदनुसार, 1554 पदों को फिर से वर्ष 2012 में भर्ती एजेंसियों के लिए भेजा गया था।
उन्होंने यह भी कहा कि 2900 से अधिक उम्मीदवारों के संबंध में नियुक्ति/ चयन किए गए लेकिन कुछ पद फिर रिक्त रहे, जो 198 याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति के द्वारा भरे गए थे। उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने क्रम संख्या 58- 2017 के आर एंड आर 2017 दिनांक 29-07-2017 से अतिरिक्त 3000 सुपरमूनरी पद भी बनाए गए। सुजित 000 पदों में से 2575 पदों को संबंधित भर्ती एजेंसियों को अक्टूबर 2017 के महीने में भेजा गया है। एक और, 290 रिक्तियों को एसएसआरबी को अगले एक हफ्ते में भेजा जा रहा है ताकि मिशन मोड के आधार पर चयन करने का अनुरोध किया जा सके। संबंधित विभागों से कुछ टिप्पणियों के संबंध में स्पष्टीकरण के तुरंत बाद शेष पदों को भर्ती एजेंसियों को भी भेजा जा रहा है। 6000 सरकारी नौकरियों के अलावा, 9000 बेरोजगार कश्मीरी विस्थापित युवाओं को स्व-रोजगार योजना के अंतर्गत वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए परिकल्पित किया गया था और प्रत्येक उम्मीदवार के लिए निर्धारित वित्तीय सहायता को कम माना गया था।मंत्री ने कहा ‘ कश्मीरी विस्थापितों के बीच स्व रोजगार और प्रोत्साहित करने के लिए स्व रोजगार और व्यापारिक उद्यमों के साथ आने के लिए 9 हजार बेरोजगार युवाओं को वित्तीय सहायता प्राप्त करने में मदद की गई। इस प्रयोजन के लिए 5 लाख रुपये की एक बार की सहायता प्रदान की जाती है।
ष्हालांकि, खराब प्रतिक्रिया के कारण, प्रत्येक उम्मीदवार के लिए निर्धारित वित्तीय सहायता को कम माना जाता था, तदनुसार, अन्य घटकों के बीच पत्र सं रेव/ एमआर/ 7 बी/ दिनांक 15.04, 2003 से गृह मंत्रालय, भारत सरकार, से अनुरोध किया गया था कि प्रत्येक उम्मीदवार को वह 5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये की सहायता करे, जिसमें 50 प्रतिशत सहायता सब्सिडी होगी और बाकी शेष ऋण के रूप में होगी और उद्यम शुरू होने के तीन साल बाद वापस भुगतान किया जाएगा।उन्होंने कहा कि इस खाते पर कुल 450 करोड़ रूपए की वित्तीय आवश्यकता के रूप में भेजी गई थी और कहा गया है कि इसके अनुमोदन की प्रतीक्षा है और राज्य सरकार इस मामले को गृह मंत्रालय, भारत सरकार के साथ फिर से उठाएगी।उन्होंने कहा कि बेरोजगार कश्मीरीविस्थापितों में उद्यमिता गुणों को बेहतर बनाने के लिए, विभाग ने पहले से ही इस मामले को समय-समय पर पहले ही आव्रजन शिविरों में रहने वाले प्रवासी युवाओं को आवश्यक प्रशिक्षण देने के लिए ईडीआई के साथ ले लिया है, जिसे फिर से अपनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि कश्मीरी विस्थापित युवाओं को घाटी में अपनी जड़ें वापस लेने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए, तत्कालीन प्रधान मंत्री द्वारा 1618.40 करोड़ रुपये का पैकेज घोषित किया गया था। इससे पहले, यासीर रेशी, सुरिंदर मोहन अंबरदार और सोफी मोहम्मद यूसुफ ने चर्चा में भाग लिया।