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शिक्षा संस्थानों को कश्मीर में सामाजिक अराजकता को दूर करने में सहायता करनी चाहिए : डॉ हसीब द्राबू

वित्त मंत्री ने चीन में तायक्वोंडो में स्वर्ण, रजत जीतने वाली छात्राओं को सम्मानित किया

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श्रीनगर 06-Dec-2017

वित्त, श्रम एवं रोजगार मंत्री डा हसीब द्राबू ने आज कहा कि कश्मीर घाटी में स्कूलों को हमारे समाज में सामाजिक विकार और अराजकता को दूर करने के लिए केंद्र बनना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘कोई भी इंसान जन्मजात इच्छा के साथ पैदा नहीं होता है। हम एक सामान्य वातावरण में बड़े हुए, लेकिन आज, यह एक असामान्य स्थिति है।  हमें म्मू-कश्मीर को एक शांतिपूर्ण और समृद्ध राज्य बनाने की आवश्यकता हैऔर  स्कूल समझने और बदलने के लिए सबसे अच्छे स्थान हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘स्कूलों को परिस्थितियों के बारे में जानकारी लेनी चाहिए और न कि सिर्फ अच्छे कामों के लिए बल्कि छात्रों को असली दुनिया का सामना करने के लिए प्रशिक्षित करना चाहिए।  स्थिति को समझने के लिए उन्हें (छात्र) उपकरण दें, एक बार वे इससे निपटने के बाद, वे इसे बदल सकेंगे।’’ मंत्री, दून इंटरनेशनल स्कूल द्वारा दो छात्राओं, मुमियाना मंजूर और महसूद फातिमा, जिन्होंने पिछले महीने मकाऊ, चीन में आयोजित तायक्वोंडो चौम्पियनशिप में स्वर्ण और रजत पदक जीता था, तथा उनके कोच उमर अकबर के लिए आयोजित एक सम्मान समारोह में बोल रहे थे।छात्रों को बधाई देते हुए डॉ द्राबू ने कहा कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर और पूरे देश के लिए ख्याति अर्जित की है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं कश्मीर में प्रतिभा को देख कर हैरान हूँ।आपको पोशण और देखभाल की जरूरत है और मुझे यकीन है कि आप नए ऊंचाइयों को छुएंगे।

’’कश्मीर में सामाजिक मूल्यों के प्रणालीगत क्षरण पर दुःख जताते हुए, वित्त मंत्री ने कहा कि जम्मू कश्मीर एक विविध, उदारवादी और मुक्तिदाता समाज था। उन्होंने कहा, ‘‘विश्व स्तर पर, उदारवाद के प्रभुत्व में वृद्धि हुई है और जम्मू-कश्मीर कोई अपवाद नहीं है लेकिन हमारी विविधता के संबंध में जम्मू व कश्मीर की तुलना में कोई संस्कृति समृद्ध नहीं है। और हमारा भविष्य अतीत में जाकार हमारे उदार मूल्यों की खोज में है।’’ डॉ द्राबू ने कहा कि स्कूलों को सांस्कृतिक संदर्भ के अनुसार विकसित करना चाहिए जिसमें वे स्थित हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ प्रत्येक विद्यालय में इसके आसपास एक संस्कृति है और इसे अपनी कुछ शिक्षाओं को अनुकूलित करना चाहिए। हमें परेशान समाजों में समय व्यतीत करना चाहिए और छात्रों के बीच संवेदनशीलता लाया जाना चाहिए जो हमारी समस्याओं का दीर्घकालिक समाधान तैयार करने में भी मदद करेगा।’’ छात्रों को पूरी तरह से जीवन का आनंद लेने के लिए प्रोत्साहित करते हुए, डॉ द्राबू ने उन्हें सलाह दी कि वे भविष्य के बारे में चिंतित न हो। उन्होंने कहा, ‘उत्कृश्ट-प्रदर्षक होने के बजाय एक अच्छा इंसान होना महत्वपूर्ण है, जीवन जीने के तरीके के रूप में शिक्षा को अवश्य लें और सुनिश्चित करें कि सिर्फ आप ही नहीं बल्कि आपके आस-पास के सभी लोग खुश हैं। रिश्तों का निर्माण और शांति समृद्धि व खुशी का एक आवास बनाने का प्रयास करें। आपको एक ऐसी दुनिया बनाना चाहिए जिसमें आप रहने की इच्छा रखते हैं।’’