मंडी की हेमलता को मॉरिशस यूनिवर्सिटी के वाईस चांसलर ने किया नेल्सन मंडेला सदभावना अवार्ड से सम्मानित
मॉरिशस में सम्प्पन हुए भव्य समारोह में मिला अवार्ड. जनजातीय व पिछड़े क्षेत्र में लड़कियों को स्कूल में दाखिला लेने व पढ़ने के लिए प्रेरित करने पर मिला सम्मान
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मंडी 18-Sep-2017
छोटी काशी मंडी की अध्यापिका हेमलता उपाध्याय ने प्रदेश का नाम दुनियाभर में रोशन किया है। हेमलता उपाध्याय को यूनिवर्सिटी ऑफ़ मॉरिशस के वाईस चांसलर प्रोफेसर धनजय झुर्री ने “अंतरराष्ट्रीय नेल्सन मंडेला सद्भावना अवार्ड व सर्टिफिकेट ऑफ़ एक्सीलेंस 2017” से मॉरिशस में हाल ही में सम्पन हुए समारोह में सम्मानित किया Iइस अंतराष्ट्रीय अवॉर्ड का आयोजन मॉरिशस के कमरल बालरूम ली मेरीडियन विलेज के सभागार में आयोजित किया गया I हिमाचलल प्रदेश से हेमलता एकमात्र चुनी हुई शिक्षिका थी जिन्हें जनजातीय एवं दूर दराज के कठिन क्षेत्र में लड्कीयों को स्कूल में दाखिला लेने व शिक्षा ग्रहण करने के लिए प्रेरित करने और शिक्षा प्राप्त कर स्वाबलंबी बनाने पर यह पुरूस्कार दिया गयाI मॉरिशस में आयोजीत पुरूस्कार वितरण समारोह में मॉरिशस यूनिवर्सिटी के वाईस चांसलर प्रोफेसर धनजय झुर्री के अतिरिक्त भारत के पूर्व राजदूत डॉ. वी बी सोनी, सचिव हाई कमीशन ऑफ़ इंडिया (मॉरिशस) आकाश गुप्ता व सचिव होली मेर्री ग्रुप हेदराबाद अरिमिन्दा विजिया शारदा रेड्डी भी उपस्थित थे I पुरूस्कार वितरण समारोह के अवसर पर हेमलता के सम्मान में विशेष तौर पर एक विडीयो चलाया गया जिसमें हेमलता के फोटो पर “आप हमारे हीरो है” (यू आर अवर हीरो) लिखा था I
हाल में मौजूद लगभग दो सौ लोगों ने हेमलता को सम्मानित करते वक्त करतल ध्वनी से तालियों द्वारा अभिनन्दन भी किया I उक्त लोगों ने हेमलता को प्रेरणाश्रोत शिक्षिका बताते हुए और उनके बुलंद हौसलों की तारिफ करते हुए ऊर्जावान भारतीय की संज्ञा दी।इस पुरूस्कार वितरण समारोह में भारतवर्ष से विभिन्न क्षेत्रों के लगभग 14 और दिग्गजों को मॉरिशस में सम्मानित किया गया Iहेमलता ने कहा की शिक्षा विभाग में उनकी पहली नियुक्ति करसोग उप मंडल के बगशाड क्षेत्र में 1984 में हुयी थी और तब बगशाड सड़क संपर्क मार्ग से भी नहीं जुड़ा था I उन्होंने बताया कि वहां पर न केवल लडकियां अपितु लडके भी स्कूल जाने से परहेज करते थे और खेतों सहित पशुओं के कार्य में अधिक रुचि लेते थेIउन्होंने बताया कि बहुत से बाल-बालिकाओं ने उनके द्वारा प्रेरित करने के बाद स्कूल में दाखिला लिया और आज वो लगभग सभी आत्मनिर्भर हैं I इसी तरह जब उन्होंने अन्य कबायली और दूर-दराज के क्षेत्रों में सेवा दी तो बाल बालिकाओं को शिक्षा के लिए प्रेरित किया जिनमे कुछ घूमतुं चरवाहों की बेटियां भी शामिल हैI हेमलता ने कहा कि शिक्षा ग्रहण करने के उपरान्त इन बाल-बालिकाओं को स्वाबलंबी और आत्मनिर्भर बनता देखना ही उनके जीवन का सबसे बड़ा अवार्ड है I हेमलता उपाध्याय आजकल राजकीय उच्च माध्यमिक पाठशाला बरयारा में बतौर प्रधानाचार्य कार्यरत हैंI