एचआईवी/एड्स के लिए ‘जीरो न्यू-जीरो भेदभाव एवं जीरो मृत्यु की नीतिः कौल सिंह ठाकुर
5 दरिया न्यूज
शिमला 05-Dec-2013
प्रदेश सरकार ने इस वर्ष एचआईवी/एड्स के लिए ‘जीरो न्यू-जीरो भेदभाव एवं जीरो मृत्यु की नीति अपनाई है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री कौल सिंह ठाकुर ने आज यहां यह जानकारी देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार का यह प्रयास है कि एचआईवी पीड़ित प्रत्येक रोगी को गुणात्मक स्वास्थ्य उपचार की सुविधाएं उपलब्ध हों और पूरे सम्मान के साथ उनका उपचार सुनिश्चित बनाया जाए। उन्होंने कहा कि एचआईवी/एड्स की पूर्ण रोकथाम तथा पीड़ित रोगियों का उपचार एवं सहायता केवल ऐसे माहौल में संभव है, जहां मानवाधिकारों का सम्मान हो तथा इस रोग से पीड़ित व्यक्ति बिना किसी भेदभाव एवं कलंक के जीवनयापन कर सकें।उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार एचआईवी को फैलने से रोकने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसके लिए व्यापक प्रतिक्रिया की व्यवस्था सृजित की गई है ताकि सभी तक पहुंचा जा सके। इसके अतिरिक्त, लोगों को एचआईवी एवं एड्स के बारे में जागरूकता एवं इस रोग की जानकारी प्रदान करने की आवश्यकता है ताकि वे अपने आप को एचआईवी से बचा सकें।
कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार ने एचआईवी/एड्स के रोगियों तथा उनके बच्चों के लिए अनेक योजनाएं कार्यान्वित की हैं। ऐसे रोगियों तथा उनके एक सहायक को एंटी रैटरोवायरल थैरेपी (एआरटी) केंद्र तक उपचार के लिए आने के लिए यात्रा किराया उपलब्ध करवाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, चिकित्सक के परामर्श पर एचआईवी पाजिटिव माताओं के शिशु को मिल्क पाउडर भी प्रदान किया जा रहा है।स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि एचआईवी/एड्स रोग पीड़ितों के निराश्रितों/बच्चों, जिनकी आयु शून्य से 18 वर्ष के मध्य है, तक तीन वर्ष तक के बच्चों को 300 रुपये प्रति माह, चार से छह वर्ष तक के बच्चों को 400 रुपये प्रतिमाह, सात से नौ वर्ष तक के बच्चों को 500 रुपये प्रतिमाह, 10 से 12 वर्ष तक के बच्चों को 600 रुपये प्रतिमाह, 13 से 15 वर्ष तक के बच्चों को 700 रुपये प्रति माह और 16 से 18 वर्ष तक के बच्चों को 800 रुपये प्रतिमाह की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।श्री ठाकुर ने कहा कि एआरटी केंद्रों में यह उपचार निःशुल्क उपलब्ध करवाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, लोक अभियान, होर्डिंग और मास मीडिया के माध्यम से लोगों को जागरूक बनाने और पीड़ितों को मुख्य धारा में लाने के लिए समय-समय पर सूचना, शिक्षा एवं संप्रेषण गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2013-14 में अब तक विभिन्न एकीकृत परामर्श एवं परीक्षण केंद्रों में 1,04,550 व्यक्तियों को एचआईवी के लिए परामर्श दिया गया है तथा 104410 व्यक्तियों का एचआईवी के लिए परीक्षण किया गया है। इस समयावधि में इन केंद्रों में 30561 गर्भवती महिलाओं को एचआईवी के लिए परामर्श प्रदान किया गया है और 30102 गर्भवती महिलाओं का एचआईवी के लिए परीक्षण किया गया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013-14 के दौरान एड्स नियंत्रण कार्यक्रमों में 18081 रक्त की इकाइयां एकत्र की गई और 13461 व्यक्तियों ने स्वैच्छिक रूप से रक्तदान किया। 18 ब्लड बैंक भी स्थापित किए गए।श्री ठाकुर ने कहा कि वर्ष 2013-14 में एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के अन्तर्गत टोल फ्री नम्बर 1299 पर टेली परामर्श के लिए 16376 फोन कॉल प्राप्त की गई। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आम लोगों और गर्भवती महिलाओं को 45 एकीकृत परामर्श केन्द्रों के माध्यम से निःशुल्क परामर्श एवं परीक्षण सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इसके अतिरिक्त प्रदेश के सभी दुर्गम क्षेत्रों और ऐसे स्थानों जहां परीक्षण सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, में दो चलित एकीकृत परामर्श एवं परीक्षण केन्द्र वाहन उपयोग में लाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में तीन ब्लड कम्पोनेंट सेपरेशन इकाइयां, एक रक्तदान चलित वाहन, चार रक्त स्थानान्तरण वाहन उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त हाई रिस्क समूह में एचआईवी/एड्स की रोकथाम के लिए स्वयं सेवी संस्थाओं के सहयोग के 34 लक्षित परियोजनाएं भी चलाई जा रही हैं।