राज्यपाल ने ‘अभिनवगुप्त के विशेष संदर्भ के साथ कश्मीर दर्शन’ पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन किया
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जम्मू 23-Mar-2017
राज्यपाल एन.एन. वोहरा ने आज यहाँ ‘अभिनवगुप्त के विशेष संदर्भ के साथ कश्मीर का दर्शन’ पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन किया, जिसे केन्द्रीय विश्वविद्यालय जम्मू में सेंटर फार कम्पेरिटिव रिलिजन एंड सिविलाइजेशन द्वारा आयोजित किया गया है।राज्यपाल ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और एक महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा करने के लिए एक संगोष्ठी के आयोजन के लिए विश्वविद्यालय की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि दार्शनिक विचार, आध्यात्मिकता, नैतिकता और सौंदर्यशास्त्र में कश्मीर के योगदान जबरदस्त महत्व का है, जैसा कि लगभग सभी प्राचीन और मध्ययुगीन भारतीय सौंदर्यशास्त्र में संस्कृत में उत्पन्न और कश्मीर में विकसित किया गया है।कश्मीर से अद्वितीय बहुमुखी प्रतिभा के एक प्रारंभिक मध्ययुगीन काल के दार्शनिक और सोच की विभिन्न धाराओं के एक महान विचारक अभिनव गुप्ता को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वह उस युग के दार्शनिक ज्ञान को एक सुसंगत रूप में तर्कसंगत बनाने में सहायक थे जिसने कश्मीर शैवस्म के विकास को सक्षम किया।राज्यपाल ने कहा कि कश्मीर के पूरे दर्शन और रहस्यवाद, जो भारतीय सांस्कृतिक परिवेश के अतुलनीय भाग हैं, की जांच और विनियोजित होने की जरूरत है ताकि यह समृद्ध विरासत संरक्षित हो और हम व भविष्य की पीढ़ियों को समझना और समृद्ध करना जारी रखे।
राज्यपाल ने कहा कि धर्म के नाम पर, दुनिया कट्टरपंथी और मौलिक विचारधाराओं से अलग हो रही है, विश्व के कई हिस्सों में संघर्ष हो रहा है, आतंकवादी हिंसा एक अंतरराष्ट्रीय समस्या के रूप में उभरी है; सहिष्णुता, सांप्रदायिक सद्भाव और भाईचारा के मूल्य गंभीर रूप से कम हो गए है और बड़े पैमाने पर दुनिया शांतिपूर्ण तरीके, सभ्य बहस और चर्चाओं के माध्यम से असहमति को सुलझाने में असमर्थ है।राज्यपाल ने कहा कि अगर शांति और सामान्यता को बहाल करना है और मानवता सभ्यता बनाए रखना है तो सदियों पुरानी परंपराओं, सहिष्णुता और भाईचारे को पुनर्जीवित करने के लिए धर्म, भाषा, जाति, रंग और पंथ की बाधाओं को पार कर कट्टरपंथी विचारधाराओं की निंदा करना होगी और सामूहिक प्रयास किए जाने की आवश्यकता होगी करते हैं।राज्यपाल ने हमारे विश्वविद्यालयों की सक्रियता पर जोर दिया कि वे सक्रिय हो और साधारण भाषा में चर्चा, बहस और लेखन के माध्यम से लोगों को हमारी महान विरासत के बारे में बड़े पैमाने पर अवगत कराएं।राज्यपाल ने आशा व्यक्त की कि अगले दो दिनों में संगोष्ठी में चर्चा बहुलवादी विचार, सांप्रदायिक सद्भाव और भाईचारे के जोरदार पुनरुद्धार के लिए एक मजबूत संदेश देगी। उन्होंने प्रतिभागियों को उपयोगी विचार-विमर्श की कामना की।प्रसिद्ध शैव विद्वान, प्रोफेसर मार्क डायकॉकोवस्की ने प्रमुख भाशण प्रस्तुत किया। इस अवसर पर यूनिवर्सिटी के उप कुलपति प्रोफेसर अशोक एमा ने भी सभा को संबोधित किया।सेंटर फार कम्पेरिटिव रिलिजन एंड सिविलाइजेशन के निदेशक, प्रो जी.एम. ख्वाजा ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और सेंटर फार कम्पेरिटिव रिलिजन एंड सिविलाइजेशन के सहायक प्रोफेसर अजय कुमार सिंह ने आभार व्यक्त किया।