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प्रदेश सरकार गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्धःमुख्यमंत्री

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शिमला 02-Dec-2013

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान कर रही है और इस वित्त वर्ष में शिक्षा क्षेत्र के लिए 3836 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो कि प्रदेश के कुल बजट का 17 प्रतिशत है। मुख्यमंत्री आज यहां राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला (छात्रा) पोर्टमोर के वार्षिक समारोह की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में साक्षरता के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है और हिमाचल की साक्षरता दर 83.78 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। प्रदेश में विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों का प्रवेश की प्रवेश संख्या देश में सर्वाधिक है। स्कूलों में इनरोलमेंट को शत-प्रतिशत करने के लिए प्रदेश सरकार और अधिक शिक्षण संस्थान खोलने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि छात्रों को उनके घरों के समीप ही शिक्षा उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में बेहतर अधोसंरचना सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई जा रही हैं।उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है और प्रदेश सरकार हिमाचल में शिक्षा के उच्च मानक बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि छात्र न केवल राष्ट्रीय अपितु अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में बने रह सकें। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने पूर्व सरकार द्वारा डी-नोटिफाईड किए गए सभी स्कूलों को क्रियाशील कर दिया है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को घर से स्कूल तथा वापिस आने-जाने के लिए प्रदेश पथ परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क बस यात्रा सुविधा प्रदान की है। इसके अतिरिक्त छात्रों की सुविधा के लिए अन्य पग भी उठाए जा रहे हैं। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए उचित पाठ्यक्रम, प्रशिक्षित अध्यापक और सेवा के दौरान अध्यापकों को नियमित प्रशिक्षण उपलब्ध करवाने पर विशेष बल दिया जा रहा है। छात्रों के शिक्षण स्तर के लिए अध्यापकों को उत्तरदायी भी बनाया जा रहा है।उन्होंने कहा कि प्रदेश में मेधावी छात्रों को प्रोत्साहन प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने यह घोषणा की है कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भारतीय प्रबन्धन संस्थान अथवा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा संस्थान में हिमाचल के छात्रों को प्रवेश मिलने पर उन्हें प्रोत्साहन के रूप में 75 हजार रुपये नकद प्रदान किए जाएंगे। श्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि पोर्टमोर स्कूल प्रदेश के श्रेष्ठ शिक्षण संस्थानों में से एक है, जहां लड़कियों को गुणात्मक शिक्षा प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस संस्थान की छात्राएं शिक्षण एवं अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों में बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इस विद्यालय की आवश्यकताओं के अनुरूप यहां और अधिक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। उन्होंने लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए कि विद्यालय परिसर की फैंसिंग की जाए और स्कूल के सभागार के लिए वैकल्पिक मार्ग का निर्माण किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्कूल को एक और छात्रावास उपलब्ध करवाने पर भी विचार करेगी। 

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर स्कूल की पत्रिका वाटिका का विमोचन किया और मेधावी छात्राओं को पुरस्कृत किया। स्कूल की प्रधानाचार्य श्रीमती निशा भलूणी ने वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह के प्रयासों के कारण ही वर्ष 2007 में इस विद्यालय के नए भवन का निर्माण किया गया था और यहां विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध करवाई गईं थीं।उन्होंने कहा कि वर्तमान में विद्यालय में 1600 से अधिक लड़कियां शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। इनमें 20 विशेष छात्राएं भी शामिल हैं।नगर निगम शिमला के महापौर श्री संजय चौहान, पूर्व उप महापौर श्री हरीश जनारथा, निदेशक उच्च शिक्षा श्री दिनकर बुराथोकी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे।