5 Dariya News

एमआईबी द्वारा लाड़ली बेटी प्रोग्राम का आयोजन, महिलाओं का सशक्तिकरण समय की मांग- डॉ निर्मल सिंह

सज्जाद ने महिला सशक्तिकरण के लिए लोगों के दिमाग में परिवर्तन लाने की आवश्यकता पर बल दिया

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जम्मू 23-Feb-2017

उपमुख्यमंत्री डॉ निर्मल सिंह ने कहा कि समय की मांग है कि महिलाओं का सशक्तिकरण हो तथा सरकार ने पहले ही इस सम्बंध विभिन्न स्तर के पग उठाये है ताकि समाज की समानातंरता के लिए इन्हें पूरी तरह सशक्त किया जाये।उपमुख्यमंत्री ने यह बात भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के गीत एवं नाटक डिवीजन द्वारा आयोजित समारोह के अवसर पर अपने सम्बोधन मंे कही जिसमें प्रांतीय केन्द्र चंडीगढ़ ने महिला एवं चाइल्ड विकास तथा सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के सौजन्य से लाड़ली बेटी के सम्बंध में ‘बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं‘ स्कीम के तहत अभिनव थियेटर में इस प्रोग्राम का आयोजन किया था।समाज कल्याण मंत्री सज्जाद गनी लोन, कुपवाडा के विधायक बशीर अहमद डार, पीआईबी की अतिरिक्त महानिदेशक भारती वेद, फिल्ड पब्लिसिटी यूनिट की उप निदेशक नेहा जिलाली, गीत एवं नाटक डिवीजन के प्रांतीय प्रमुख बलजीत सिंह, बीजेपी के वरिश्ठ नेता अशोक कौल, गणमान्य नागरिक तथा विभिन्न विभागों के वरिश्ठ अधिकारी भी समारोह के अवसर पर उपस्थित थे।डॉ सिंह ने कहा कि समाज में परिवर्तन लाने के लिए हम सभी को महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु एकजुटता से प्रयास करने होंगे। 

उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले ही महिलाओं के कल्याण के लिए विभिन्न स्कीमें शुरू की है जिसके माध्यम से जीवन के हर क्शेत्र में महिलाओं को समानांतर अवसर भी उपलब्ध करवाये जा रहे है।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा महिलाओं की सशक्तिकरण एवं प्रत्येक बालिका के संरक्शण हेतु उठाये गये कदमों पर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने पहले ही बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं अभियान को एक मिशन के तौर पर लागू किया है तथा राज्य सरकार ने भी केन्द्र स्कीमों के साथ विभिन्न स्कीमें भी लागू की है।उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास साक्शी है कि महिलाओं द्वारा विभिन्न क्शेत्रों जैसे प्रशासनिक, लिटरेचर एवं कला में बेहतर योगदान दिया है तथा महिलाओं के द्वारा समाज में परिवर्तन लाने के लिए भी विभिन्न स्तर का सहयोग दिया है।समाज कल्याण मंत्री ने भी समारोह को सम्बोधित किया तथा कहा कि प्रत्येक स्तर पर महिलाओं को सशक्त करने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न प्रोग्रामों को जमीनी स्तर पर लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि लोगों के दिमाग में भी परिवर्तन लाने की जरूरत है ताकि समाज में महिलाओं को सम्माजनक स्थान प्राप्त हो सके।समारोह के अवसर पर डोगरी, सूफी, कश्मीरी लोकनृत्य पर अधारित संस्कृति प्रोग्रामों की प्रस्तुति दी।