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एसीएस रजिस्ट्री विकसित करने में हिमाचल पहले स्थान पर

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शिमला 27-Nov-2013

एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम (एसीएस) रजिस्ट्री सिस्टम के माध्यम से हार्ट अटैक के मामलों का पूर्ण विश्लेषण करने में हिमाचल प्रदेश को उत्तरी भारत में पहला और केरल के बाद देश का दूसरा राज्य बनने का गौरव प्राप्त हुआ है। प्रदेश में यह ऑनलाईन सिस्टम इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल शिमला के कार्डियोलॉजी विभाग के एचपी मल्टी सेंटर एसीएस रजिस्ट्री द्वारा विकसित किया गया है। इस सिस्टम द्वारा हिमाचल प्रदेश के सभी जिलों में 22 सरकारी अस्पतालों और 6 निजी अस्पतालों के माध्यम से प्राप्त हार्ट अटैक के विभिन्न मामलों की जानकारी का विस्तृत डाटा तैयार किया जा रहा है।कार्डियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष एवं एचपी मल्टी सेंटर एसीएस रजिस्ट्री के प्रधान जांचकर्ता डॉ. पी.सी. नेगी ने बताया कि इन 28 अस्पतालों में जब भी हार्ट अटैक से ग्रसित मरीज उपचार के लिए आता है, तो उसके बारे में सम्पूर्ण जानकारी आईजीएमसी स्थित एसीएस रजिस्ट्री को ऑनलाईन भेजी जाती है। उन्होंने कहा कि विश्लेषण के लिए मरीज के लिंग, आयु, आदतों, क्षेत्र विशेष, तम्बाकू व शराब के सेवन सहित कई अन्य जानकारी ली जाती है। इस डाटा से क्षेत्र विशेष में हार्ट अटैक कारणों का पता लगाने के साथ-साथ मरीज की देखभाल में गुणात्मक सुधार लाने में मदद मिलेगी। इससे ऐसे क्षेत्रों, जहां इनकी संख्या अधिक है, का भी पता चल सकेगा। 

एसीएस रजिस्ट्री के माध्यम से अस्पतालों में तैनात पैरामेडिकल स्टाफ हार्ट अटैक के लक्षणों का पता लगाकर और प्रभावी तरीके से त्वरित चिकित्सा सुनिश्चित बनाने में कार्य कर सकेंगे।डॉ. नेगी ने कहा कि हार्ट अटैक के बाद मरीज को प्रथम छह घंटों में उपचार मुहैया करवाना अत्यन्त आवश्यक होता है। एसीएस रजिस्ट्र के माध्यम से प्राप्त डाटा से यह जानने में भी मदद मिलेगी कि किन क्षेत्रों में मरीजों को हार्ट अटैक होने के छह घंटे के बाद प्रथम उपचार के लिए अस्पताल में लाया जा रहा है और वहां किन सुविधाओं को उपलब्ध करवाने की आवश्यकता है।उन्होंने उम्मीद जताई कि यह तकनीक निश्चित तौर पर हार्ट अटैक के मामलों के विश्लेषण और मरीजों के उपचार के लिए मील का पत्थर साबित होगी।