नेता प्रतिपक्ष ने अभी नहीं तो कभी नहीं के नारे के साथ लोहानी से एसवाईएल के लिए शुरू किया जन अभियान
एसवाईएल का पानी लेकर रहेंगे: अभय चौटाला, लोगों से 23 फरवरी को इस्माईलपुर पंहुचने का किया आह्वान
5 Dariya News
भिवानी 01-Dec-2016
एसवाईएल के निर्माण के लिए शुरू होने वाले दूसरे न्याययुद्ध के लिए आज से जन अभियान की शुरूआत करते हुए हरियाणा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अभय सिंह चौटाला ने लोगों से 23 फरवरी को पंजाब हरियाणा सीमा पर स्थित गांव इस्माईलपुर में एसवाईएल खोदने के लिए ज्यादा से ज्यादा लोग पहुंचकर हरियाणा के हक की लड़ाई की शुरूआत करने का आह्वान किया। इनेलो नेता ने कहा कि यदि अब चूक गए तो फिर कभी पानी हरियाणा में नहीं आ सके गा। राजनीति से ऊपर उठकर आम आदमी को एसवाईएल की लड़ाई के लिए इनेलो के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना होगा। यह अपील वीरवार को एसवाईएल निर्माण के लिए भिवानी जिले के लोहानी गांव से जनजागरण की अभियान की शुरूआत करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने की। उसके बाद जुई, पात्थरवाली, देवराला, खरकड़ी माखकान, संडवा के किसानों को एसवाईएल का पानी लाने के प्रति जागरूक करते हुए बैठकें की। उन्होंने कहा कि प्रदेश को अब तक एसवाईएल का पानी जो नहीं मिल पाया तो उसका मुख्य कारण 1966 से 1977 के बीच रहे प्रदेश के मुख्यंमत्री थे। सन 1977 में ताऊ देवीलाल ने मुख्यमंत्री बनते ही सतलुज यमुना लिंक नहर का पानी हरियाणा को दिलाने के लिए मुहिम शुरू की थी। उसके बाद राजीव लोंगौवाल समझौते के तहत जब हरियाणा के हितों को क्षति पंहुचाने का प्रयास किया गया तो ताऊ देवी लाल ने न्याय युद्ध शुरू किया और हिसार से चंद लोगों के साथ दिल्ली कूच किया और जननायक चौधरी देवीलाल दिल्ली तक पहुंचते-पहुंचते लाखों की संख्या में काफिला लेकर पहुंचे तथा सरकार को हरियाणा के साथ हो रही ज्यादती पर तुरंत सोचने और समझौता लंबित करने के लिए मजबूर कर दिया था।
इनेलो नेता ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल ने भी हरियाणा विधानसभा में यह माना था कि एसवाईएल के निर्माण का कार्य 90 फीसदी ताऊ देवीलाल ने करवाया था। 1999 से लेकर 2005 तक के इनेलो शासनकाल के दौरान इनेलो सुप्रीमो औमप्रकाश चौटाला के नेतृत्व वाली सरकार की जोरदार पैरवी से माननीय सुप्रीम कोर्ट में 26 जनवरी 2002 को हरियाणा के हक में फैसला सुनाया। अभय चौटाला ने सभी पार्टियों से राजनीति से ऊपर उठकर पानी की इस लड़ाई में मिलकर साथ चलने की बात कही। अभय चौटाला ने हरियाणवी लहजे में कहा कि जिब दो भाई न्यारे होंवे तो दोनवा नैं समान बंटवारा दिया जा सै लेकिन सन 1966 में पंजाब हरियाणा विभाजन के दौरान छोटे भाई हरियाणा के साथ 60:40 का भेदभाव होया। ये सब भी हामण ने सहन किया। भाजपा सरकार को घेरते हुए उन्होंने कहा कि आज किसान की फसल में भी सरकार मुनाफा कमा रही है। बाजरे का जहां सरकारी भाव 1330 रुपये है वहीं इसे 1100 रुपये में खरीदा जा रहा है। बीमा के नाम पर किसानों के खाते से पैसे काटे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा व केंद्र में भाजपा सरकार है जबकि पंजाब में अकाली-भाजपा की संयुक्त सरकार है। यदि अब भी पंजाब व केंद्र एसवाईएल के निर्माण नहीं करते हैं तो हरियाणा को तुरंत प्रभाव से दिल्ली जाने वाले पंजाब के रास्तों को रोक देना चाहिए यदि सरकार ने ऐसा नहीं किया तो इनेलो हरियाणा के किसान की खातिर यह काम करके दिखाएगी।
नेता प्रतिपक्ष चौधरी अभय सिंह चौटाला ने गांव पात्थरवाली में युवा इनेलो नेता के आवास पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान कांग्रेस की स्थानीय विधायिका किरण चौधरी पर चुटकी लेते हुए कहा कि जो पार्टी ड्राईंग रूम की राजनीति करती है वह किसान के दर्द को क्या समझेगी? नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि उन्होंने स्वयं मुख्यमंत्री मनोहरलाल, भूपेंद्र सिंह हुड्डा व किरण चौधरी, अशोक तंवर से एसवाईएल के मुद्दे पर बात की। लेकिन वे लोग संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। अब हालत यह हो गई है कि मुख्यमंत्री पीएम से समय लेने की बात करते हैं लेकिन आज 10 दिन बीत जाने के बाद भी सीएम को प्रधानमंत्री से मिलने का समय नहीं मिला। उन्होंने कहा कि भाजपा कमजोर सरकार का तगमा लेने की एच्छुक है। यदि पंजाब नहर का निर्माण नहीं होने देता है तो मुख्यमंत्री मनोहरलाल को तुरंत प्रभाव से पंजाब के दिल्ली जाने वाले रास्ते रोक देने चाहिए।उन्होंने कहा कि राजीव लोंगोवाल समझौते के तहत तत्कालीन हरियाणा के मुख्यमंत्री भजनलाल ने राजीव गांधी को खुश करने के लिए हरियाणा के हक की कुर्बानी दी थी। यदि कांग्रेसी व भाजपा के लोग सही मायने में एसवाईएल को लेकर गंभीर हैं तो वे सोनिया गांधी और अमित शाह को जाकर पंजाब के विधायकों द्वारा दिए गए इस्तीफे मंजूर करवाकर पंजाब में राष्ट्रपति शासन लागू करवाएं और सेना की मौजूदगी में नहर का निर्माण करवाए। इस अवसर पर उनके साथ पूर्व विधायक व इनेलो किसान प्रकोष्ठ के प्रदेशाध्यक्ष पूर्ण सिंह डाबड़ा, राव बहादुर सिंह, बलदेव वाल्मीकि, सुनील लांबा, कमला रानी, रविंद्र पटौदी, राजेंद्र गांधी, अशोक ढाणीमाहूं, अनूप बागनवाला, पार्षद मनोज यादव, राजेश भारद्वाज, राजसिंह गागड़वास, मुन्ना रापडिय़ा, जितेंद्र शर्मा, कुलवंत कोंटिया, उमेद गौरीपुर, राजेंद्र सरपंच, सलोचना पोटलिया, सूबे सिहं ढिल्लो, राजू मेहरा, कृष्ण वर्मा, छत्तरपाल बीडीसी, रमेश खारियावास, माया हेतमपुरा, हरिश तोशाम, मुकेश महतानी, सुखबीर संडवा, संदीप थिलौड़, धीरा पटौदी, सुभाष रंगा, महाबीर कुसुंभी, सतबीर, जयसिंह लोहानी, जैना शर्मा, जोगेंद्र बागनवाला, कुलदीप मनसरवास, अशोक सरपंच लोहानी, वीरेंद्र बापोड़ा, सुगनपाल खान, बल्ली शेखावत, कपूर निंगाना, नरेश रापडिय़ा, विजय रापडिय़ा, रणबीर मलिक, रोशनलाल, विनोद गोयत, सुरेंद्र पोटलिया, मंदरूप बेडवाल, बबलू मिराण, मुख्तयार सरपंच, ऋषिपाल फौगाट, बीर सिंह संडवा, नानक सरपंच, सुनील बिढौला, वजीर मान, सुरेंद्र राठी समेत अनेक पार्टी नेता व कार्यकत्र्ता मौजूद थे।