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बाल श्रम रोक कर चाचा नेहरू को दें सच्ची श्रद्धांजलि

5 दरिया न्यूज (नेहा वर्मा) सरोज

13-Nov-2013

देश की वास्तिवक संपत्ति देश के बच्चे होते हैं। पंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्म दिवस 14 नवंबर बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि बच्चों से नेहरू जो को बहुत लगाव था। वो इस दिन बच्चों को लाल गुलाब और मिठाइयां बांटते थे। यही कारण है कि बच्चे उन्हें चाचा नेहरू के नाम से पुकारते थे। कहने को तो बच्चे आजाद हैं, मगर असल में देखें तो देश के कई ऐसे ढाबे, दुकानें, फैक्ट्रीज और अमीर लोगों की कोठियों में अब भी बच्चों से काम लिया जा रहा है। कई ऐसे मासूम बच्चे हैं, जो खेलने-कूदने की उम्र में बाल मजदूर बने बैठे हैं। कई संस्थाओं ने बालश्रम को रोकने के लिए कई अहम कदम उठाए और काफी हद तक कामयाबी भी हासिल की, परंतु दुख की बात तो यह है कि आज भी बाल मजदूरी की यह प्रथा खत्म  नहीं हो पाई और मासूम अपना बचपन भूल कर मजदूरी करने पर विवश हैं। सरकार द्वारा भी बाल मजदूरी खत्म करने के लिए खास कदम उठाए तो गए हैं, परंतु बाल मजदूरी खत्म नहीं हो पाई। इसके पीछे सरकार द्वारा बच्चों के लिए दी गई सुविधाओं का सही उपयोग नहीं हो रहा । जो सुविधाएं बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के लिए दी जा रही हैं, वह या तो उन गरीब बच्चों तक पहुंचतीं नहीं या फिर सुविधाएं फाइलों तक ही सीमित हैं। बाल श्रम को खत्म करने के लिए सख्त कानून अमल में लाया जाना चाहिए ताकि बच्चे अंधकार से बाहर आ सकें और पढ़-लिख कर अपना जीवन संवार सकें। यही बच्चे ही कल के भविष्य हैं। इन मासूमों का बाल श्रम से छुटकारा दिलवा कर नेहरू जी के जन्म दिवस पर उन्हें सच्चो तोहफा दें। आओ आज हम इस दिवस पर एक प्रण लेकर बाल मजदूरी के खिलाफ आवाज उठाएं और बच्चों का भविष्य उज्जवल बनाएं, यही नेहरू जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।