विमुद्रीकरण वापस हो, भ्रष्ट लोगों को जेल भेजें : अरविंद केजरीवाल
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नई दिल्ली 13-Nov-2016
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से विमुद्रीकरण को अविलंब वापस लेने और अवैध स्विस बैंक खाताधारकों को जेल भेजने का आग्रह किया। आम आदमी पार्टी (आप) के नेता ने आगाह किया कि अगर देश में नकदी की कमी का हाल ऐसे ही बना रहा तो कानून-व्यवस्था के बिगड़ने का खतरा पैदा हो सकता है।केजरीवाल ने संवाददाताओं से कहा, "मोदीजी, अगर कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा हुई तो उसे संभालना मुश्किल हो जाएगा।"उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री से 500 और 1000 रुपये के नोटों को अमान्य घोषित करने के फैसले को वापस लेने का आग्रह कर रहे हैं। इसने देश के आम आदमी को बहुत बड़ी मुसीबत में डाल दिया है।केजरीवाल ने मोदी के गोवा में दिए गए इस भाषण पर भी उन्हें आड़े हाथ लिया, जिसमें उन्होंने देशवासियों से समस्या के हल के लिए 50 दिन देने की अपील की थी।
केजरीवाल ने कहा, "तो, क्या इसका मतलब यह है कि बाजार अगले 50 दिन तक बंद रहेंगे? किसानों का क्या होगा? क्या लोग 50 दिन तक लाइन में लगे रहेंगे? वह (मोदी) केवल भावुक भाषण दे रहे हैं।"उन्होंने प्रधानमंत्री से 'नाटकबाजी' बंद करने को कहा। उन्होंने मोदी से कहा कि वह पहले स्विस बैंक में अवैध खाता रखने वाले 'अपने दोस्तों' को जेल भेजें।केजरीवाल ने मोदी को संबोधित करते हुए कहा, "लोगों को उम्मीद है कि आप उनके (स्विस बैंक में अवैध खाता रखने वालों के) खिलाफ कार्रवाई करेंगे। एक बार जब आप भ्रष्ट लोगों को जेल में डाल देंगे, भ्रष्टाचार अपने आप खत्म हो जाएगा।"मुख्यमंत्री ने कहा, "पहले इस फैसले को बदलिए। अपना अहं छोड़िए।
आप अच्छी तरह योजना बनाकर इसे बाद में लागू कर सकते हैं।केजरीवाल ने कहा कि मोदी ने गोवा में कहा कि 125 करोड़ देशवासियों में कुछ ही बेईमान हैं, तो फिर पूरे देश को किस बात की सजा दी जा रही है।उन्होंने कहा कि इस फैसले से घर-घर में बेचैनी फैल गई है। मोदी के 50 दिन मांगने के बाद तो यह बेचैनी अब और बढ़ गई है।केजरीवाल ने कहा कि मोदी को अपनी इस बात के लिए माफी मांगनी चाहिए कि घोटालों में शामिल लोग बैंकों के बाहर कतारों में खड़े हैं। उन्होंने आम आदमी का मजाक बनाया है। उन्हें माफी मांगनी चाहिए।केजरीवाल ने कहा कि यह आम लोग हैं, जो अपना पैसा वापस पाने के लिए कतारों में धक्के खा रहे हैं।उन्होंने ट्रांसपोर्ट जगत के सिर पर मंडरा रहे खतरे के प्रति भी आगाह किया, जिसके पास चालकों को देने के लिए पैसे नहीं हैं। उन्होंने पूछा कि अगर परिवहन क्षेत्र पर असर पड़ा तो लोगों को रोजमर्रा की जरूरी चीजें कैसे मिलेंगी।