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पंजाब में वित्तीय एमरजैंसी का शिकार बने कर्मचारियों एवं पेंशनरों के हक में आई ‘आप’, सरकार को जमकर कोसा

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चंडीगढ़ 28-Sep-2016

पंजाब की प्रकाश सिंह बादल सरकार को वित्तीय प्रबंधन में पूरी तरह विफल सरकार करार देते हुये आम आदमी पार्टी (आप) ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के हक में आवाज बुलंद की है। बुधवार को ‘आप’ द्वारा जारी प्रेस बयान में पार्टी के प्रदेश सचिव गुलशन छावड़ा और प्रशासनिक एवं शिकायत निवारण सैल के मुखी जसबीर सिंह बीर (सेवानिवृत आईएएस) ने कहा कि बादल सरकार के कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार कारण अघोषित वित्तीय एमरजैंसी लगा दी है। जिस कारण राज्य के सात लाख से ज्यादा सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रहे हैं और रोष प्रदर्शन करने को मजबूर हैं।गुलशन छावड़ा और जसबीर सिंह बीर ने बताया कि आज की तारीख में सरकारी खजाने में से कर्मचारियों और पेंशनरों को उनके मेडिकल बिल, जीपीएफ (जर्नल प्रॉविडेंट फंड) में से बच्चों के विवाह-शादी, फीस अथवा अन्य खर्च और बकाया राशि समेत सेवानिवृति लाभ आदि की एक रुपये की भी अदायगी नहीं हो रही। ‘आप’ नेताओं के अनुसार यह हालात पिछली 15 जुलाई से बने हुये हैं और ओवर-ड्राफट की स्थिति में अगले दिनों में भी सुधार की कोई उम्मीद नहीं नजर आ रही। 

जसबीर सिंह बीर ने बताया कि सरकार के वित्तीय संकट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स वर्ष 2014 की महंगाई भत्ते (डीए) की दो बकाया किश्तों का आज तक इंतजार कर रहे हैं। जनवरी 2016 को घोषित किये 6 फीसदी डीए की किश्त भी आज तक जारी नहीं की गई। संघर्ष को मजबूर कर्मचारी संगठनों के साथ वित्तमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक किये गये वादे वफा नहीं हो रहे। ‘आप’ नेताओं ने पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को आश्वासन दिया कि वर्तमान सरकार से उन्हें कोई उम्मीद नहीं लेकिन 2017 में आम आदमी पार्टी की सरकार बनते ही सरकारी कर्मचारियों,  अधिकारियों और सेवानिवृत पेंशनर्स के हितों का विशेष ख्याल रखा जायेगा, क्योंकि अकाली दल और कांग्रेस सरकारों के भ्रष्टचार और वित्तीय कुप्रबंधन के कारण आज सरकारी कर्मचारी और अधिकारी बेहद दबाव में काम करने को मजबूर हैं। एक-एक कर्मचारी और अधिकारी पर कई-कई सीटों का कार्यभार है।