5 Dariya News

आम आदमी पार्टी की तरफ से अकालियों के महा-घोटालों संबंधी वाइट पेपर जारी

अकाली-भाजपा सरकार की तरफ से 2007 में सत्ता संभालने के समय बिजली दरें घटाने संबंधी किए वायदे के उलट, खप्तकारों पर घोटालों के बोझ के कारण बिजली दरें 9 सालों में डबल हुई

5 Dariya News

एस.ए.एस. नगर (मोहाली) 03-Aug-2016

आम आदमी पार्टी (आप) ने आज अकाली-भाजपा सरकार की तरफ से बिजली क्षेत्र में किए जा रहे अनेकों घोटालों का पर्दाफाश करते पंजाब में बिजली की हालत संबंधी वाइट पेपर जारी किया ; जो पंजाब को फालतू बिजली वाला सूबा बनाने संबंधी बढ़ -चढ़ कर किए जाते दावों की असली कहानी को ब्यान करता है और इसके साथ ही इस में विस्थारपूर्वक यह बताया गया है कि इस सरकार के पिछले नौ वर्षों दौरान हुई भारी बेनियमियों के कारण कैसे बिजली दरें डबल हो गई हैं।आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधि और सीनियर नेता चंद्र सुता डोगरा और लीगल विंग के प्रमुख हिम्मत सिंह शेरगिल ने जारी किए वाइट पेपर में बताया है कि पंजाब को कैसे हर साल 3,745 करोड़ रुपए का नुक्सान हो रहा है। निजी बिजली प्लांटों के लिए जानबुझ कर विशेष बिजली उत्पादन नीति तैयार किए गए हैं और उन प्लांटों और निजी कंपनियों के साथ दोषपूर्ण बिजली खरीद समझौते (पी.पी.ए.) किए गए हैं ; जिस कारण मोटी रकमें तलवंडी साबो, राजपुरा और गोइन्दवाल साहिब स्थित निजी थर्मल बिजली प्लांटों को निश्चित सामर्था चारिजस के नाम के नीचे जा रही हैं। इन प्लांटों को यह रकमें कम मांग वाले समय दौरान अपने प्लांट बंद रखने के लिए मिल रहे हैं 

परन्तु दूसरे समय में उनसे महंगी बिजली खरीदी जा रही है। जो सरकारी ताप (थर्मल) बिजली प्लांट सस्ती बिजली पैदा करते हैं, उनको जानबुझ कर आधी से भी कम सामर्था पर चलाया जा रहा है। उनकी सामर्था 1,70,000 लाख युनिट सालाना बिजली उत्पादन की है परन्तु वह साल 2016 -17 दौरान केवल 73,080 लाख युनिट बिजली का उत्पादन करेंगे, जिससे सूबा, महंगे निजी उत्पादकों से ओर बिजली खरीद सके। ऐसा इस कारण हो रहा है क्योंकि सरकार ने पहले बिजली की समस्या का बहुत बढ़-चढ़ कर हला किया था, और फिर उसके आधार पर ही पिछले कुछ सालों दौरान नए प्रोजेक्टों को मंजूरी दी गई। निजी क्षेत्र में 1,80,000 लाख युनिट की फालतू बिजली सामर्था दरअसल 2,500 करोड़ रुपए का बोझ है, जो पंजाब के मजबूर खप्तकार बर्दाश्त कर रहे हैं। दोषपूर्ण बिजली खरीद समझौते निजी उत्पादकों को फायदा पहुंचा रहे हैं और पंजाब को कोई छूट या रियायत नहीं मिल रही।सब से दुखद मामला गोइन्दवाल साहिब का है, जहां जी.वी.के. ग्रुप ने अपना निजी थर्मल प्लांट स्थापित किया है। चंद्र सुता डोगरा ने बताया कि गोइन्दवाल साहिब के प्लांट के लिए पी.एस.ई.आर.सी. ने इस के संचालन के पहले ही साल पी.एस.पी.सी.एल. की 100 प्रतिश्त बिजली देने (सरेंडर करने) की तजवीज स्वीकार की है परन्तु इस बंद प्लांट के लिए भी 413.75 करोड़ रुपए निश्चित सामर्था चारजिस के तौर पर अदा करने पड़ रहे हैं।

पंजाब बिजली उत्पादन नीति 2010 की अगर गुजरात बिजली नीति 2009 के साथ तुलना की जाए, तो पता लगता है कि जैसे गुजरात स्थित निजी बिजली उत्पादक अपने सूबे को 20 प्रतिश्त छूट पर बिजली देते हैं, अगर सूबा सरकार की सिफारशों पर ईंधन समझौता हुआ हो ; पंजाब में ऐसा कुछ भी उपलब्ध नहीं है। इस कारण 774 करोड़ रुपए सालाना का ओर फालतू नुक्सान हो रहा है।आम आदमी पार्टी इन समझौतों और बिजली उत्पादन नीति 2010 की समीक्षा करेगी और ऐसी स्थिति के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए उच्च स्तरीय जांच करवाएगी।यहां ही बस नहीं, सरकार ने तो निजी बिजली कंपनियों से लिकुईडेटड डैमेजस (निर्णीत /समाप्ति हरजाने) के तौर पर बनती 1,230 करोड़ रुपए की रकम तक वसूल नहीं की। यह रकम निजी बिजली कंपनियों से तब ली जाती है, जब वह समय सिर अपने नए प्लांट चालू न कर सकें, जैसे कि समझौतों में व्यवस्था दी गई है। नतीजे के तौर पर खप्तकारों को बिजली की अनउपलब्धता के कारण न केवल बड़े बिजली कट बर्दाश्त करने पड़ रहे हैं, बल्कि सूबे को बाहर से महंगी बिजली खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

फिर, हरखप्तकार तक बिजली की सप्लाई बेरोक पहुंचाने के उद्देश्य की पूर्ति के लिए बिजली वितरण प्रणाली में उच्च स्तरीय पर कोई विस्तार करने की जगह सरकार ने केंद्र की आर.ए.पी.डी.आर.पी. (रीस्टरक्कचरड ऐकसैलरेटड पावर डिवैल्पमैंट रीफारमज प्रोगराम भाव पुनर्गठत तीखन बिजली विकास सुधार प्रोग्राम) योजना अधीन बिजली बांट प्रणालियों को अपग्रेड करने में 437 करोड़ रुपए का एक ओर घोटाला किया। पी.एस.पी.सी.एल. ने कुल 1,717 करोड़ रुपए का काम दिए, जब कि विभागीय लागत 1,280 करोड़ रुपए थे और भुगतानों की मदों केवल फरमों को फायदा पहुंचाने के लिए बदली गई। जो कोई कंपनियों को यह काम दिए गए हैं, उनमें ए 2 जैड नाम की एक कंपनी भी है, जो दरअसल मुख्य मंत्री के जमाई आदेश प्रताप सिंह कैरों के परिवार की है ; जो कि प्रकाश सिंह बादल के मामलो में सरासर हितों के विरोध की स्थिति है क्योंकि तब बड़े बादल खुद बिजली मंत्री थे।बिजली सप्लाई की सांझी औसत लागत जो साल 2006 -07 दौरान 329.94 पैसे प्रति यूनिट था, वह साल 2016 -17 दौरान बढ़ कर 597.95 पैसे प्रति यूनिट हो गई।

यह वाइट पेपर ओर भी राज उधेड़ता हुआ आगे बताता है कि कृषि क्षेत्र को मुफ्त बिजली सब्सिडी का 80 प्रतिश्त बोझ वास्तव में घरेलू, व्यापारिक और औद्योगिक खप्तकारों पर डाला जा रहा है। इस वर्ष 5196 करोड़ रुपए की खेती सब्सिडी में से सभी अन्य खप्तकारों से क्रास सब्सिडी के द्वारा 4235 करोड़ रुपए वसूल किए गए हैं और बिजली ड्यूटी भी बहुत ज़्यादा 18 प्रतिश्त है। इसमें से 1495 करोड़ रुपए की क्रास सब्सिडी घरेलू, औद्योगिक और व्यापारिक खप्तकारों से वसूल की गई और 13 प्रतिश्त ई.डी.  5 प्रतिश्त बुनियादी ढांचा वास फंड से इक_ी की रकम 2,650 करोड़ रुपए बनती है। यह रकम बिजली क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की जगह सीधी सूबे के खजाने में जमा करवा दी जाती है। फिर, सरकार पी.एस.पी.सी.एल. को भी मुकम्मल सब्सिडी बकाए अदा नहीं करती। सरकार ने इस साल 5592 करोड़ रुपए अदा करने थे, परन्तु जून 2016 तक पी.ऐस.पी.सी.ऐल. को अभी केवल 500 करोड़ रुपए ही दिए गए हैं।आम आदमी पार्टी के नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी की सरकार किसानों को मुफ्त बिजली देने की वचनबद्धता का पूरा सम्मान करेगी परन्तु वह अन्य वर्ग के खप्तकारों प्रति अपनी जिम्मेदारी भी कभी नहीं भुलेगी। 

अन्य आम खप्तकारों को भले ही महंगी बिजली इस्तेमाल करनी पड़ रही है परन्तु चोटी के अकाली नेताओं ने यह यकीनी बनाया हुआ है कि उनके इलाकों के समर्थक इन उच्च दरों से बचे रहें क्योंकि उनके क्षेत्रों में 30 से 42 प्रतिश्त बिजली चोरी हो रही है (वाइट पेपर में दी गई जानकारी देखें)। आम आदमी पार्टी की मांग है कि इन इलाकों में विजीलैंस की तरफ से चैकिंग की जानी चाहिए और वहां लापरवाही करने वालों या बिजली चोरी करने वालों से वसूल की रकम के विवरण जनतक किए जाने चाहिएं।बिजली संबंधी यह वाइट पेपर यह भी बताता है कि झारखंड का कैप्टीव पछवाड़ा कोयला ब्लाक कैसे मार्च 2015 में पंजाब को फिर दिया गया है परन्तु उसे आग लगी हुई है और पंजाब सकरार मैस. अदानी इंटरप्राईजस के द्वारा दक्षिणी अफ्रीका से कोयला बरामद कर रही है और यही कोयला बठिंडा, लहरा मोहब्बत और रोपड़ स्थित तीन सरकारी थर्मल बिजली प्लांटों तक पहुंचाया जा रहा है। पिछले साल 500 करोड़ रुपए मूल्य का 6 लाख टन कोयला आया था परन्तु अपनी खुद की कोयला खाने में लगी आग को बुझाने और अपना खुद का कोयला निकालने के लिए कोई यत्न नहीं किया गया। इस के साथ पंजाब को सालाना 600 करोड़ रुपए से ले कर 800 करोड़ रुपए तक का नुक्सान हो रहा है।