45 दिन से अधिक समय से गैर हाजि़र विद्यार्थियों का नाम अलग रजिस्टर में दर्ज कर मुख्यालय को सूचना भेजने के लिए कहा
स्कूल छोडऩे वाले विद्यार्थियों को पुन:स्कूल लाने के लिए शिक्षा वलनटियरों की निरन्तर सेवाएं लेने के निर्देश
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एस ए एस नगर (मोहाली) 27-Jul-2016
शिक्षा विभाग द्वारा इस वर्ष पहली बार अपने स्तर पर एस सी ई आर टी द्वारा ली गई पांचवीं व आठवीं की परीक्षा दौरान 10 हजार विद्यार्थियों की गैर हाजि़री को गंभीरता से लेते शिक्षा मंत्री डा.दलजीत सिंह चीमा ने असल कारणों की जांच व इनके हल के लिए सुझाव लेने के लिए आज स्कूल मुखियों व जिला शिक्षा अधिकारियों के साथ बैठक की। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के ऑडिटोरियम में चली इस मैराथन बैठक में पांचवीं की परीक्षा वाले 121 स्कूलों और आठवीं की परीक्षा वाले 264 स्कूलों के मुखी बैठक में शामिल हुए जिनके आठ या इससे अधिक विद्यार्थी परीक्षा दौरान गैर हाजि़र पाए गए। डा. चीमा ने गैर हाजि़र विद्यार्थियों संबंधी मु यालय तक लगातार जानकारी ना दिए जाने को गंभीरता से लेते स्कूल मुखियों व जिला शिक्षा अधिकारियों को ताडऩा की कि भविष्य में ऐसा ना घटित हो और गैर हाजि़र विद्यार्थियों का डाटा तैयार करके इसे रिकॉर्ड पर लाया जाए तथा इन विद्यार्थियों को उत्साहित करके पुन: स्कूल भी दाखिल करवाया जाए।
बैठक दौरान सामने आए तथ्यों उपरांत शिक्षामंत्री ने अवसर पर ही कई अह्म एलान करते कहा िक 30 या इससे अधिक विद्यार्थियों वाले प्रत्येक प्राईमरी स्कूल में हैड टीचर पक्के तौर पर तैनात किया जाएगा जिसके लिए 8000 हैड टीचरों की पदोन्नतियां आगामी समय में की जाएंगी। उन्होंने कहा कि अध्यापकों के रिक्त पदों को भरने के लिए 4500 ई टी टी अध्यापकों की भर्ती 10 दिनों के भीतर की जाएगी तथा 2000 के लगभग ओर ई टी टी अध्यापकों की भर्ती के लिए विज्ञापन दिया जाएगा। प्राईमरी स्कूलों में विद्यार्थियों को खेल गतिविधियों द्वारा स्कूल के साथ जोडऩे के उद्धेश्य से डा.चीमा ने कहा कि इस वर्ष केवल प्राईमरी स्कूलों के लिए डेढ़ करोड़ रूपए का खेल सामान खरीदा गिया है जिसका वितरण आगामी 10 दिनों तक प्रत्येक स्कूल को किया जा रहा है। इसके साथ विद्यार्थी खेलों के साथ जुड़ेगें। स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने की बात करते उन्होंने कहा कि मिडल स्कूलों तक फर्नीचर खरीदने के लिए 7 करोड़ रूपए खर्चे जा रहे हैं जिसके साथ कोई भी स्कूल बुनियादी सुविधाओं से वंचित नहीं रहेगा।
शिक्षा मंत्री द्वारा स्कूल मुखियों और जिला शिक्षा अधिकारियों के साथ संयुक्त्त बातचीत दौरान कई अह्म बातें सयामने आईं जिन्हें गंभीरता से लेते डा.चीमा ने मौके पर ही हल और इसके कारणों की गहराई तक जांच करने के लिए आदेश किए। बैठक दौरान जो बातें उभर कर सामने आईं उनमें अधिकतर प्रवासियों मज़दूरों के बच्चों की समस्या थी जो अभिभावकों के एक स्थान से दूसरे स्थान पर शिफट होने कारण स्कूल जाने से असमर्थ हो जाते हैं। कुछ प्रवासी मज़दूरों के बच्चों संबंधी एक आश्चर्यजनक तथ्य सामने आया कि विद्यार्थियों का बाल विवाह होने के कारण स्कूल जाना छोड़ देते हैं। इसके अलावा बच्चों द्वारा मज़दूरी करने या कोई दूसरा काम सीखने जाने के कारण भी गैर हाजि़र विद्यार्थियों की गिनती में बढ़ोतरी हुई। शिक्षा का अधिकारी (आर टी ई) कानून के भ्रम व गलत व्या यान कारण कई स्कूल मुखी 3-4 वर्षों से बच्चे के स्कूल ना आने के बावजूद उस बच्चे का दाखिला अगली कक्षा में करते रहते हैं जिस कारण यह बच्चे गैर हाजि़री की गिनती में शामिल हो जाते हैं। घरेलू स्थिति कारण भी कई बच्चे स्कूल छोड़ जाते हैं। बैठक् में शामिल अध्यापकों द्वारा इमानदारी के साथ बताए कारणों दौरान एकाध स्कूलों में बच्चों के बोगस दाखिलों का मामला सामने भी आया ताकि अध्यपकों के पद बचे रहें। इसके अलावा एकाध स्कूलों में अनुशासन की कमी का मामला भी सामने आया।
शिक्षा मंत्री ने बैठक दौरान उक्त तथ्यों केे उजागर होने के बाद प्रत्येक कारण के हल और कुछेक अनियमितताओं को दूर करने के लिए पड़ताल के आदेश भी किए। आर टी ई की गलत व्या या को दूर करने के लिए शिक्षा मंत्री ने आज सैधांतिक फैसला लेते कहा कि भविष्य में स्कूल में दो रजिस्टर लगाए जाए जिनमें पहले पर दाखिल हुए विद्यार्थियों का ब्योरा और दूसरे रजिस्टर पर ऐसे विद्यार्थियों के नाम लिखे जाएं जो 45 दिन या इससे अधिक समय से गैर हाजि़र हों। इसकी जानकारी ब्लॉक स्तर से लेकर मु यालय तक निरंतर दी जाएग। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड तैयार ना किए जाए और इसे गंभीरता से ना लेने का खामियाज़ा पूरे ेराज्य पर पड़ सकता है क्योंकि इस से राज्य का स्कूल छोडऩे वाले विद्यार्थियों का अनुपात ( ड्राप आउट) बहुत बिगड़ जाएगा।प्रवासी मज़दूरों के बच्चों के बाल विवाह और बाल मज़दूरी को बहुत गंभीर समस्याएं बताते डा.चीमा ने कहा कि यह कानून की उल्लंघना है। उन्होंने कहा कि इस संबंधी समूह उपायुक्त्तों को लिखकर इस की पड़ताल के आदेश दिए जाएंगे औेर आवश्यकता पडऩेपर बनती कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। बोगस दाखिलों के मामले सामने आने औेर कोटकपूरा व मोगा के एक स्कूल में अनुशासनहीनता की बात सामने आने पर शिक्षा मंत्री ने तुरंत दोनों डी पी आईज़ (सैकंडरी व एलीमेंटरी) को निजी तौर पर इन मामलों की पड़ताल करके रिपोर्ट सौँपने के लिए कहा।
डा.चीमा ने स्कूल मुखियों व जिला शिक्षा अधिकारियों को कहा कि स्कूलों में विद्यार्थियों के छोडऩे की सूरत में वह गैर सरकारी संस्थाओं और स्थानीय जनतक प्रतिनिधियों पंचायत कौंसलर को साथ लेकर जागरूकता मुहिम आरभ करें और विद्याथ्रियों के अभिभावकों को इस संबंधी सुचेत करें कि बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए शिक्षा सबसे आवश्यक है। इसके साथ ही उन्होंने विभिा को यह निर्देश दिए कि राज्य में तैनात 7000 के लगभग शिक्षा/ ई जी एस वलनटियर जिनकी ड्यूटी केवल स्कूल छोड़ जाने वाले बच्चों को स्कूल पुन: दाखिल करवाने के लिए उन्हें उत्साहित करने की है, यह कार्य सौंपा जाए। वलनटियरों को स्कूल छोडऩे वाले विद्यार्थियों का डाटा देकर यह जि मेवारी दी जाए कि वह इन विद्यार्थियों को स्कूलों में वापिस लेकर आएं। इस संबंधी सरकार द्वारा विद्यार्थियों को दी जाती नि:शुल्क सुविधाओं का भी प्रचार किया जाए।आज की बैठक में डायरेक्टर जनरल स्कूल शिक्षा श्री प्रदीप अग्रवाल, डी पी आई (सैकंडरी शिक्षा) श्री बलबीर सिंह ढोल, डी पी आई (एलीमेंटरी शिक्षा) श्रीमती पंकज शर्मा, डायरैक्टर (प्रशासन) श्रीमती गुरप्रीत कौर धालवाल, एस सी ई आर टी के डायरैक्टर श्री सुखदेव सिंह काहलों,डिप्टी डायरैक्टर डा. गिन्नी दुग्गल, डिप्टी डायरेक्टर श्री इन्द्रजीत सिंह व पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव श्री जे आर महरोक भी उपस्थित थे।