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मुख्यमंत्री ने केन्द्र सरकार से भोटी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने का आग्रह किया

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शिमला 26-Oct-2013

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने भारत सरकार से भोटी भाषा को भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने का आग्रह किया है। केन्द्रीय गृह मंत्री श्री सुशील कुमार शिंदे को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि भोटी भाषा राज्य के लाहौल-स्पीति, किन्नौर, कुल्लू तथा चम्बा जिले के कुछ भागों में बोली जाने वाली भाषा है। उन्होंने कहा कि भारत के हिमालयी राज्यों में 16 लाख से अधिक जनसंख्या भोटी बोलती है तथा हिमाचल प्रदेश में तीन लाख से अधिक लोग इस भाषा में बातचीत करते हैं, जबकि जनजातीय जनसंख्या इसका पूर्ण उपयोग करती है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने लाहौल एवं स्पीति, किन्नौर, कुल्लू, मण्डी जिलों तथा पांगी के स्कूलों में भोटी भाषा को शामिल करने के लिए समिति गठित की है। प्रदेश सरकार ने लाहौल-स्पीति, किन्नौर तथा कुल्लू जिलों के स्कूलों में भोटी भाषा को पहले ही शामिल किया है। श्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि भोटी भाषा न केवल हिमालयी क्षेत्र बल्कि पड़ौसी देशों की प्राचीन भाषाओं में से एक है। इसकी उच्च विकसित भाषा है तथा विभिन्न विषयों पर इस भाषा में आलेख एवं साहित्य हैं। इसे भूटान, नेपाल, मंगोलिया, तिब्बत तथा समूचे मध्यम एशियाई देशों में लिखित में तथा स्थानीय स्तर पर बोला जाता है। जम्मू एवं कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तरांचल, पश्चिम बंगाल, सिक्किम तथा अरूणांचल प्रदेश के लोगों के दैनिक जीवन में इसे व्यापक तौर पर उपयोग में लाया जाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस भाषा की लिपि भारतीय विद्वानों की सहायता से कई शताब्दी पूर्व विकसित की गई तथा यह देवनागरी लिपि पर आधारित है। उन्होंने कहा कि भारतीय अध्यातम की व्याख्या के लिए जिस प्रकार संस्कृत का ज्ञान आवश्यक है, उसी प्रकार हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले भोटी समुदाय के लोगों की भावनाओं एवं उनकी आकांक्षाओं को व्यक्त करने के लिए भोटी भाषा आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कई विकासशील एवं विकसित राष्ट्रों में उच्च अध्ययन संस्थान भोटी भाषा के अध्ययन को बढ़ावा दे रहे हैं तथा भारत तथा विदेशों के विभिन्न विश्वविद्यालयों में इसे पढ़ाया जा रहा है।श्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में भोटी भाषा को शामिल करने से इसे न केवल उचित मान्यता प्राप्त होगी, बल्कि देश के दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय लोगों की आकांक्षाओं को भी पूरा किया जा सकेगा।