5 Dariya News

बाबा साहिब ने समाज को सचेत करने के लिए अपना जीवन समर्पित किया -राजेश बाघा

गोर्वमिंट आई टी आई एससी इ पाईज़ यूनियन पंजाब ने डॉ अंबेडकर की 125वीं जन्म वर्षगांठ मनाई

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चंडीगढ़ 04-Jun-2016

बाबा साहिब डॉ. भीम राव अंबेडकर ने अपना जीवन समाज को सचेत करने में समर्पित किया और उन्होंने एक अलग संसार की कल्पना की थी उन्होंने मानव स्वतंत्रता से मानव स मान को महत्ता दी। बाबा साहिब ने आपसी सहयोग, शांतिपूर्ण, आदरमय तथा स य और शिक्षित संसार बनाने के विचार के प्रति समाज को सचेत करने के लिए अपना जीवन लगाया। वह एक महान विद्वान और सुधारक थे जो एक नये निर्भय समाज के निर्माण के लिए लगातार संघर्ष करते रहे।आज यहां गोर्वमिंट आई टी आई एससी इ पाईज़ यूनियन पंजाब द्वारा डॉ भीम राव अंबेडकर की 125वीं जन्म वर्षगांठ को समर्पित कान्फ्रेंस के अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुये पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन श्री राजेश वाघा ने कहा कि डॉ. अंबेडकर दूरदर्शी थे जो अपने जमाने से बहुत आगे सोचते थे। उन्होंने कहा कि बाबा साहिब को केवल दलित विकास के साथ जोड़ा जाता है परंतु इस बात को गैर दलित समाज द्वारा समझने की जरूरत है कि वह दलितों के प्रति चिंतित होने के साथ-साथ आर्थिक, राजनीतिक, धर्म निरपेक्ष तथा विदेशी संबंधों के क्षेत्र में भी बेजोड़ थे।

श्री बाघा ने कहा कि भारत का संविधान से यह सिद्ध हो जाता है कि बाबा साहिब की सोच सबके लिए सांझी थी। संविधान का प्रारूप तैयार करते समय, उनके  अथक प्रयास किसी जाति या वर्ग विशेष की सोच से बलवान नही थी, बल्कि उन्होंने जाति, रंग या नस्ल के भेदभाव के बिना प्रत्येक नागरिक को विश्व का सबसे बढिय़ा संविधान बनाकर अपना विलक्षण योगदान दिया। उन्होंने कहा कि परंतु यह अफसोसजनक बात है कि एक ऐसी श शीयत जो इस देश के प्रत्येक व्यक्ति से संबंधित थी, उसको केवल एक विशेष समाज से जोड़ दिया जाता है।चेयरमैन ने आगे कहा कि डॉ. अंबेदकर ने महिलाओं के सामाजिक रूतबे की बराबरी के लिए अनेकों कार्य किये। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेदकर सदैव ही महिलाओं को विश्व की प्रत्येक सोसाइटी में सामाजिक-आर्थिक विकास में एक अह्म हिस्सा मानते थे और समाज की प्रगति को महिलाओं द्वारा हासिल की प्रगति के साथ जोड़ते थे।श्री बाघा ने आगे कहा कि देश के पहले कानून मंत्री डॉ. अंबेदकर ने अपनी असाधारण शैक्षणिक और पेशेवाराना योग्यताओं के साथ विशाल ज्ञान तथा अनुभव हासिल किया जो उनके अपने जीवन काल के दौरान विभिन्न मुश्किलों और चुनौतियों का सहासिक सामना करते हुये प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि इस महान श शीयत का 125वां जन्म दिवस विश्वभर के देशों के लोगों द्वारा मनाया जा रहा है। यह हमारे लिये गौरव की घड़ी है और विश्वव्यापी भाईचारे द्वारा भारतीय संविधान के पितामह को दी जाने वाली एक शानदार श्रद्धांजलि है। इस अवसर पर गोवर्नमिंट आई टी आई, एससी इ पलाइज़ यूनियन के पदाधिकारी तथा उपस्थित अन्य प्रवताओं ने अपने विचार सांझे किये।