निजि स्कूलों की लूट पर आप की आवाज बुलंद
5 Dariya News (मोनिका शर्मा)
ज्वालामुखी 12-May-2016
प्रदेश में निजी स्कूलों द्वारा छात्रों के अभिभावकों को फीस के नाम पर लूट-घसूट का संज्ञान लेते हुए आम आदमी पार्टी ने हमीरपूर को छोड कर सभी जिलों में हेल्प लाईन चालू कर दी है, आज हमीरपूर में भी 88949 03006 की हेल्प लाईन शुरू कर दी है।आम आदमी पार्टी के जोनल ईन्चार्ज डी.एस.पथिक ने बताया कि पार्टी द्वारा प्रदेश के सभी जिलो में हेल्प लाईन खोलने के बाद जहां छात्रों के अविभावकों पर व्यापक असर हुआ है और आप से सम्पर्क करना शुरू कर दिया ह,ै वहीं हिमाचल शिक्षा बोर्ड के सचिव भी सचेत हो गए है और उन्होने भी निजी स्कूलों द्वारा मनमानी को रोकने के लिए ऐक कमेटी के गठन का एलान किया है उधर शिमला के उपायुक्त ने भी काफी दिनो पहले एक कमेटी का गठन किया था और 15 दिनों में रिर्पोट देने की हिदायत दी थी परन्तु 15 दिनो की अवधि बीत जाने के बाद भी रिर्पोट आई नही कब तक आएगी इसका भी कोई अता-पता नही।
पार्टी के नेता ने बताया कि प्रदेश में सभी प्राईवेट स्कूल हर साल भारी भरकम एडमिशन फीस ले रहे है जब कि सूचना के अधिकार से प्राप्त जानकारी के अनुसार कोई भी निजी स्कूल हर साल एडमिशन फीस नहीं ले सकता। हालांकि सभी प्राईवेट स्कूल एडमिशन के दौरान बिल्डिंग फण्ड भी लेते है परन्तु कुछ स्कूल साल में चार बार मेनटेनेस और डेवेलपमैंट फीस भी चार्ज कर रहे है। इन स्कूलों में किताबों का बोझ इतना ज्यादा है कि छोटे बच्चे उस बोझ को उठाने में असहाय अनुभव करते है हैरान करने की बात तो यह है कि छात्रों को सी.बी.एस ई. और हिमाचल शिक्षा बोर्ड की पाठ्य पुस्तकें कम और दुसरे प्रकाशकों की मंहगी पुस्तके अधिक पढाई जाती है क्योकि उन पुस्तको में प्राईवेट स्कूल को भारी कमीशन मिलती है। इन स्कूलों के अविभावको को पुस्तके और युनिफार्म भी निश्चित की गई दुकानों से ही लेने को विवश किया जाता है।
आप नेता ने खुलासा किया कि प्राईवेट स्कूल सोसायटी एक्ट और ट्स्ट के नियमों के आधार पर पंजीकृत होते हैं। एक्ट के अनुसार ऐसे विद्यालयों को हर साल ऑडिट रिपोर्ट जारी करना अनिवार्य होता है परन्तु देखने में आया है कि कोई भी विद्यालय ऑडिट रिपोर्ट जारी नहीं करता। इन स्कूलों ने अगर भवन बनाना हो या खेल का मैदान या विकास का कोई भी काम करना होता है तो वह पैसा भी छात्रों के अविभावकों से वसूला जाता है। गौर करने की बात यह है कि प्राईवेट स्कूलों को जहां सरकार न्यूनतम धन राशी पर जमीन लीज पर देती है, वही ऐसे स्कूलों को बिना ब्याज के कर्ज भी सरकारे मुहैया करवाती हैं। इस प्रकार जहां सरकारो से फायदा उठाते है वहीं पेरेन्टस से मनमर्जी की लूट फीस के रूप में कर रहे है।शिक्षा के अधिकार नियम 2009 में साफ तौर पर लिखा है कि एक समान गुणवता वाली पूुर्णकालिक अनिवार्य और नि:शुल्क आरम्भिक शिक्षा प्रत्येक 6से 14 साल आयु के बच्चे का अधिकार है। संविधान के अनुच्छेद 21-क एक अप्रैल 2010 को लागू हो गया है। जिसके तहत 25 फीसदी गरीब बच्चों को निजि स्कूलों में एडमिशन देना अनिवार्य किया है परन्तु प्राईवेट स्कूलों में अभी तक 25 प्रतिशत गरीब बच्चों को एडमिशन नही मिल पा रहा है।
आप नेता ने बताया कि अधिकतर नीजि स्कूलों का कहना है कि कुल फीस का 70 फीसदी स्टाफ को वेतन भतों में खर्च किए जाते हैं मगर वास्तव में ऐसा नही है। आप नेता ने प्रदेश सरकार पर अरोप लगाया है कि सरकार की इन निजि स्कूलों के लिए कोई कायदे कानून नही बनाए है और सरकारी संरक्षण में ये निजि शिक्षा संस्थान शिक्षा के नाम पर अपनी दूकाने खोले है।उन्होने बताया कि आज सरकारी स्कूलों की दूर्दशा के कारण ही ये शिक्षा की दुकाने भारी मुनाफा कमाने का साधन बन गए है। आप नेता ने कहा कि आम आदमी पार्टी प्रदेश में शिक्षा के नाम पर इन दूकनो की मन मानी से रोकने के लिए भरसक प्रयास करेगी ओर यदि इस ममाले में सरकार शीघ्र कोई साकार पग नही उठाती तो आप अदालत में इस माामले को उठाएगी ओर इस लूट से छात्रों के अविभावको को निजात दिलाने को पूरा प्रयास करेगी।