‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की भावना को जीवन का अभिन्न अंग बनाएं- आचार्य देवव्रत
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सोलन 01-May-2016
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने युवाओं का आह्वान किया है कि देश एवं प्रदेश के विकास के लिए ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की भावना को जीवन का अभिन्न अंग बनाएं। राज्यपाल आज हिमगिरी आश्रम सोलन के वार्षिक उत्सव की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारम्भ किया।आचार्य देवव्रत ने कहा कि सनातन भारतीय संस्कृति में मानवता की सेवा, परोपकार और सभी के सुखी जीवन की कामना को मनुष्य के उत्थान तथा समाज के विकास के लिए अनिवार्य माना गया है। उन्होंने कहा कि आज के भौतिकतावाद के समय में युवाओं को मानव जाति की सेवा के लिए तैयार किया जाना आवश्यक हो गया है। छात्रों को ऐसे संस्कार दिए जाने चाहिए, जो उन्हें स्वार्थ की संकीर्ण मानसिकता से उपर उठकर सभी के हित में आगे बढ़ना सिखाएं। उन्होंने कहा कि निःस्वार्थ सेवा के द्वारा जहां मानवता को एकता के एक सूत्र में पिरोया जा सकता है, वहीं वैश्विक गांव की अवधारणा को भी सभी के सहयोग से साकार किया जा सकता है।
राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान में सत्त विकास राजनीतिक एवं सामाजिक सोच का महत्त्वपूर्ण अंग बनकर उभरा है। सत्त विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भी सुसंस्कारित एवं नैतिक मूल्यों में विश्वास रखने वाले नागरिकों का होना आवश्यक है।उन्होंने आश्रम के छात्रों से आग्रह किया कि वे स्वतन्त्रता सेनानियों एवं महापुरूषों के जीवन से प्रेरणा लें और उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग का अनुसरण करें। उन्होंने आश्रम में शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों को देश की संस्कृति एवं मानवीय मूल्यों की शिक्षा प्रदान करने के लिए आश्रम के पदाधिकारियों और अध्यापकों को बधाई दी।आचार्य देवव्रत ने कहा कि हिमगिरी आश्रम सोलन तथा देश के अन्य भागों में कार्यरत वनवासी कल्याण आश्रम देश के दूर-दराज एवं जनजातीय क्षेत्रों के युवाओं को बेहतर शिक्षा उपलब्ध करवाने में सराहनीय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने आश्रम के अध्यापकों से आग्रह किया कि भविष्य में भी छात्रों को भारतीय संस्कृति एवं स्थानीय लोककलाओं की जानकारी देते रहें।उन्होंने इस अवसर पर हिमगिरी कल्याण आश्रम सोलन को एक लाख रुपए प्रदान करने की घोषणा भी की।आश्रम एवं सैंट ल्यूक्स सोलन के छात्रों द्वारा इस अवसर पर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया।
राज्यपाल ने इस अवसर पर आश्रम के लिए सराहनीय कार्य करने वाले व्यक्तियों तथा छात्रों को सम्मानित भी किया।कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं पंजाब टैक्निकल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. रजनीश अरोड़ा ने इस अवसर पर कहा कि वनवासी कल्याण आश्रम की स्थापना वर्ष 1952 में बाला साहेब देशपाण्डे द्वारा की गई थी। वर्ष 1978 में इन आश्रमों की श्रृंखला को देश के सभी वनवासी एवं जनजातीय क्षेत्रों में स्थापित करने का कार्य आरम्भ हुआ। उन्होंने कहा कि इन आश्रमों का मुख्य उदद्ेश्य राष्ट्र कल्याण की भावना को सुदृढ़ करना है।हिमगिरी कल्याण आश्रम के प्रान्त सचिव श्री निहाल चन्द ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान में प्रदेश में 4 ऐसे आश्रम कार्यरत हैं। किन्नौर जिले में छात्राओं के लिए तथा शिमला, चम्बा एवं सोलन में छात्रों के लिए हिमगिरी कल्याण आश्रम कार्य कर रहे हैं। हिमगिरी कल्याण आश्रम सोलन में 60 छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।हिमगिरी कल्याण आश्रम की कार्यसमिति के डा. अमित विक्रम ने वार्षिक प्रतिवेदन तथा अध्यक्ष श्री नारायण सिंह ठाकुर ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।इस अवसर पर वनवासी कल्याण आश्रम के क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्री सुरेश कुलकर्णी, नगर परिषद सोलन के अध्यक्ष श्री पवन गुप्ता, पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष शीला, पुलिस अधीक्षक सोलन अंजुम आरा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।