गोवा में भाजपा का सबसे बड़ा आलोचक आरएसएस
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पणजी 04-Apr-2016
गोवा में विधानसभा चुनाव एक साल बाद होना है। विपक्षी पार्टी कांग्रेस का बुरा हाल है, लेकिन आश्चर्यजनक ढंग से यहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार का तीखा आलोचक बन गया है। संघ निजी प्राथमिक स्कूलों में शिक्षा के माध्यम (भाषा) और तौर-तरीकों के मुद्दे पर सरकार से खफा है। इन निजी स्कूलों को रोमन कैथोलिक चर्च चला रहा है।आरएसएस के प्रांत प्रमुख सुभाष वेलिंगकर ने राज्य की भाजपा सरकार और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर पर निशाना साधते हुए कहा कि इन दोनों ने राज्य में भारतीय भाषाओं की लड़ाई को धोखा दिया है। वेलिंगकर का मानना है कि सरकार अपने क्रियाकलापों से निम्नस्तर पर पूरी तरह नहीं उतरी है, लेकिन संघ की लाइन पर चलने से भी मना कर दिया है। वेलिंगकर ने शुक्रवार को बयान जारी कर गोवा में नेतृत्व को चेतावनी दी कि प्राथमिक निजी स्कूलों में शिक्षा के माध्यम के रूप में अंग्रेजी भाषा को प्रश्रय देने से गोवा में छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। उन्होंने सरकार पर दोहरा चरित्र अपनाने का भी आरोप लगाया।वेंलिंगकर ने कहा, "अंग्रेजी माध्यम के निजी स्कूलों को अनुदान देकर हमारे भविष्य को बर्बाद मत करो। भविष्य तुम्हें माफ नहीं करेगा। गोवा के लोग एक बार ठगे जा चुके हैं और अब मुंह में राम बगल में छुरी वाली तुम्हारी मनोवृत्ति का शिकार नहीं होंगे।"
दरअसल, वर्ष 1991 में तत्कालीन सरकार ने फैसला लिया गया था कि सरकारी अनुदान केवल उन्हीं प्राथमिक स्कूलों को मिलेंगे, जिनका शिक्षा का माध्यम कोंकणी है या मराठी। अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों को सरकारी वित्तीय सहायता की सूची से बाहर रखा गया था। आरएसएस चाहता है कि फिर यही व्यवस्था लागू हो।अंग्रेजी माध्यमों के प्राथमिक स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के बढ़ते चलन के मद्देनजर अभिभावकों को अपने बच्चों को चर्च के स्कूलों में पढ़ाने पर मजबूर होना पड़ा। इस बीच 2010 में चर्च के अधिकारियों की शह पर अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों को भी सरकारी अनुदान देने की मांग उठाई गई।गोवा में 2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने इस समस्या का तार्किक हल निकालने का वादा किया था। लेकिन दूसरी ओर भारतीय भाषा सुरक्षा समिति (बीबीएसएस) के नेतृत्व में चल रहे अभियान का भी समर्थन किया। इस अभियान से लेखक, शिक्षाविद् और राजनेता जुड़े थे जो भारतीय भाषाओं के समर्थक थे। इस अभियान का अगुवा वेलिंगकर थे। ये लोग अंग्रेजी माध्यम के निजी प्राथमिक स्कूलों को सरकारी अनुदान दिए जाने के खिलाफ थे।
राज्य में भाजपा नीति गठबंधन की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने पहले से चल रहे अंग्रेजी माध्यम के अल्पसंख्यकों द्वारा संचालित संस्थानों को तदर्थ रूप से अनुदान देने का फैसला किया। लेकिन नए स्कूलों को यह सुविधा देने से मना कर दिया गया।हालांकि आरएसएस ने उस समय भी सरकार के इस फैसले की आलोचना की थी और इसे शर्मनाक समझौता कहा था। अब जब विधानसभा चुनाव फिर नजदीक आ रहा है तो संघ का विरोध शुरू हो गया है।वेलिंगकर ने आईएएनएस से कहा, "बीबीएसएस के अभियान के चलते ही भाजपा पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को दे पाई थी। अगर हमारी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो हम इस सरकार के खिलाफ प्रचार करेंगे।"वेलिंगकर के कद को देखते हुए भाजपा इस मुद्दे पर उनके साथ बहस में नहीं पड़ना चाहती। राज्य में संघ और भाजपा के कई नेताओं को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका रही है। मनोहर पर्रिकर और लक्ष्मीकांत पारसेकर भी उनके शिष्य रहे हैं।
वेलिंगकर के बयान पर टिप्पणी करने से बचते हुए भाजपा के एक नेता ने कहा, "अपनी राय देने का हर व्यक्ति को हक है। गोवा के छात्रों के लिए जितना अच्छा कर सकते हैं, वह हम कर रहे हैं।"इस संदर्भ में भाजपा ने एक विधेयक भी तैयार किया है, जिस पर प्रवर समिति में चर्चा चल रही है। इस विधेयक को बजट सत्र में ही पेश किया जाना था, लेकिन आसन्न चुनाव को देखते हुए इसे टाल दिया गया।भाजपा के एक नेता ने कहा, "अगर अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों को अनुदान दिया जाता है तो संघ के नाराज होने का खतरा है और अनुदान रद्द करने पर कैथोलिक वोट खिसक जाएंगे।" गोवा में कैथोलिक ईसाइयों की संख्या 15 लाख है।इस आंदोलन के कभी हिस्सा रहे मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर भी इस मुद्दे पर यथास्थिति बनाए रखने के पक्ष में हैं।पारसेकर ने कहा, "मेरी व्यक्तिगत राय है कि अल्पसंख्यकों के संस्थानों का अनुदान बंद नहीं होना चाहिए।"