5 Dariya News

अगली फसल से प्राकृतिक आपदा से खराब फसलों का मुआवजा देने से इनकार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण: अभय सिंह चौटाला

नरमे-कपास की बर्बाद हुई फसलों के मुआवजे में सरकार कर रही है भेदभाव: अभय सिंह चौटाला

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चंडीगढ़ 18-Mar-2016

इनेलो के वरिष्ठ नेता एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चौधरी अभय सिंह चौटाला  ने हरियाणा के मुख्यमंत्री की उस घोषणा को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कड़े शब्दों में निंदा की है जिसमें उन्होंने कहा था कि मौजूदा फसलों के बाद अगली फसल से किसानों को प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान का सरकार अपनी ओर से कोई मुआवजा नहीं देगी और किसानों को अपनी फसलों का कृषि बीमा योजना के तहत स्वयं बीमा करवाना चाहिए। इनेलो नेता ने कहा कि एक तरफ मुख्यमंत्री हरियाणा को कृषि प्रधान प्रदेश बताते हुए अपनी सरकार को किसान हितैषी बताते हैं वहीं किसानों को सरकार की ओर से मुआवजा दिए जाने से साफ इनकार कर रहे हैं और गवार, बाजरा व ज्वार की खेती करने वाले किसानों को हुए नुकसान के मुआवजे से भी सरकार ने पल्ला झाड़ लिया है।

इनेलो नेता ने सरकार पर नरमे-कपास की फसलों को सफेद मक्खी से हुए नुकसान के मुआवजे में सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाया है। यह बात इनेलो नेता ने हरियाणा विस के बाहर पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही। उन्होंने यह मामला हरियाणा विस में भी उठाया था इसके अलावा पंजाब सरकार द्वारा आज फिर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बावजूद पंजाब विधानसभा में एक असंवैधानिक प्रस्ताव पारित किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि पंजाब अब यह कह रहा है कि वे सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को भी नहीं मानेंगे और एसवाईएल नहर को नहीं बनने देंगे। इसके दृष्टिगत हरियाणा विस को भी एक प्रस्ताव पारित करना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दे पर हरियाणा के मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब ने आज जो प्रस्ताव पारित किया है वह बेहद खेदजनक है और उनकी सरकार इस प्रस्ताव को भी सर्वोच्च न्यायालय के संज्ञान में लाएगी ताकि अदालत इस पर गम्भीरता से कार्रवाई कर सके।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि एक तरफ जहां सफेद मक्खी, तेला व ओलावृष्टि से ज्वार, बाजरा व गवार की खराब हुई फसलों को मुआवजे से छोड़ दिया गया वहीं जिन किसानों की पांच एकड़ से ज्यादा नरमे-कपास की फसलों का नुकसान हुआ है उनका मुआवजा भी सीमित करके मात्र पांच एकड़ तक कर दिया गया है। इनेलो नेता ने कहा कि गेहूं की फसलों को जब ओलावृष्टि व बारिश से नुकसान हुआ था तो उस समय सरकार ने किसानों के लिए पांच एकड़ वाली कोई शर्त नहीं लगाई थी और जिस किसान की जितनी फसल का नुकसान हुआ था उन्हें उतने एकड़ के लिए ही मुआवजा दिया गया था। इनेलो नेता ने राज्यपाल के अभिभाषण पर हो रही चर्चा पर मुख्यमंत्री द्वारा दिए जा रहे जवाब के दौरान भी विधानसभा में यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री यह कह रहे हैं कि नरमे कपास की फसल पर सफेद मक्खी के प्रकोप से जिन फसलों को नुकसान हुआ था उन पांच जिलों की गिरदावरी रिपोर्ट जो आई थी उन्हें मुआवजा दे दिया गया है। उन्होंने जुलाना उप-तहसील की 2577 एकड़ की खराब हुई फसल की रिपोर्ट का भी उल्लेख करते हुए कहा कि जिन किसानों की प्राकृतिक आपदा अथवा अन्य किसी कारणों से फसलें बर्बाद हुई हैं उन सबको सरकार फौरी तौर पर सहायता के रूप में मुआवजा राशि प्रदान करे और पांच एकड़ की शर्त भी हटाई जाए।

इनेलो नेता ने कहा कि आज सरकार कह रही है कि जिन किसानों की फसलें खराब होने को लेकर गिरदावरी होकर नहीं आई अब उनका कुछ नहीं किया जा सकता। दूसरी तरफ मुख्य संसदीय सचिव बखशीश सिंह ने इसी सदन में ये कहा था कि असंध हलके के किसानों की बारिश व ओलावृष्टि से गेहूं की जो फसलें खराब हुई थी और जिनकी गिरदावरी होकर नहीं आई थी उन्हें पिछले साल की फसल के जे-फार्म के आधार पर अब सरकार द्वारा 90 लाख रुपए का मुआवजा दिया जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अगर असंध हलके के मामले में किसानों को जे-फार्म के आधार पर मुआवजा दिया जा सकता है तो फिर प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के किसानों जिनकी फसलें बर्बाद हुई थी लेकिन राजस्व अधिकारियों ने उनकी खराब फसल की गिरदावरी करके नहीं भेजी उन्हें भी उसी तर्ज पर पिछले साल के जे-फार्म को आधार मानकर फसल का मुआवजा दिया जाए।